प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल रॉयल सोसाइटी के फेलो चुने गए
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के निदेशक प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल को 20 मई 2026 को रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना गया। यह सम्मान विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया है। रॉयल सोसाइटी यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक अकादमी है, जिसकी स्थापना वर्ष 1660 में हुई थी। इसे दुनिया की सबसे पुरानी विद्वत संस्थाओं में गिना जाता है। प्रोफेसर अग्रवाल की यह उपलब्धि भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।
रॉयल सोसाइटी फेलोशिप का महत्व
रॉयल सोसाइटी की फेलोशिप को विज्ञान जगत के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल किया जाता है। इस सम्मान को प्राप्त करने वाले वैज्ञानिक अपने नाम के साथ “एफआरएस” लिख सकते हैं। यह फेलोशिप उन व्यक्तियों को प्रदान की जाती है जिन्होंने विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग या चिकित्सा के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो। दुनिया के कई महान वैज्ञानिक, जिनमें आइजैक न्यूटन और अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे नाम शामिल हैं, इस संस्था से जुड़े रहे हैं। प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल का चयन भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करता है।
एकेएस प्राइमैलिटी टेस्ट के लिए प्रसिद्धि
प्रोफेसर अग्रवाल को विशेष पहचान सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान में उनके कार्य के कारण मिली। उन्होंने वर्ष 2002 में नीरज कायल और नितिन सक्सेना के साथ मिलकर “एकेएस प्राइमैलिटी टेस्ट” विकसित किया था। यह शोध भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर में किया गया था। एकेएस प्राइमैलिटी टेस्ट गणित और कंप्यूटर विज्ञान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है क्योंकि यह किसी संख्या के अभाज्य होने की जांच करने वाला पहला पूर्णतः निर्धारक बहुपद-समय एल्गोरिद्म था। इस एल्गोरिद्म का नाम अग्रवाल, कायल और सक्सेना के उपनामों के प्रथम अक्षरों से बनाया गया है।
शिक्षा और शैक्षणिक जीवन
मनींद्र अग्रवाल का जन्म 20 मई 1966 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1986 में आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री प्राप्त की और 1991 में इसी संस्थान से पीएचडी पूरी की। वे अप्रैल 2024 में आईआईटी कानपुर के निदेशक बने। इसके अलावा वह द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज, भारत की तीनों प्रमुख विज्ञान अकादमियों तथा अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के विदेशी सहयोगी सदस्य भी रह चुके हैं।
पुरस्कार और सम्मान
प्रोफेसर अग्रवाल को विज्ञान और गणित में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें वर्ष 2006 में गोडेल पुरस्कार और फुल्कर्सन पुरस्कार प्रदान किया गया था। वर्ष 2008 में उन्हें गणित के लिए पहला इंफोसिस पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया। उनकी उपलब्धियां भारतीय वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा मानी जाती हैं और उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रॉयल सोसाइटी की स्थापना वर्ष 1660 में लंदन में हुई थी।
- एकेएस प्राइमैलिटी टेस्ट 2002 में मनींद्र अग्रवाल, नीरज कायल और नितिन सक्सेना द्वारा प्रकाशित किया गया था।
- एकेएस एल्गोरिद्म बहुपद-समय जटिलता वाला निर्धारक प्राइमैलिटी टेस्ट है।
- मनींद्र अग्रवाल को वर्ष 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
प्रोफेसर मनींद्र अग्रवाल का रॉयल सोसाइटी का फेलो चुना जाना भारत के वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान दर्शाता है कि भारतीय शोधकर्ता वैश्विक स्तर पर विज्ञान और गणित के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।