अश्मिता चालीहा ने रचा इतिहास, कोरिया मास्टर्स में पहली भारतीय चैंपियन बनीं
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अश्मिता चालीहा ने 9 अगस्त 2026 को कोरिया मास्टर्स का महिला एकल खिताब जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह इस टूर्नामेंट को जीतने वाली पहली भारतीय बनीं और साथ ही उन्होंने अपना पहला BWF वर्ल्ड टूर सुपर 300 खिताब भी हासिल किया।
फाइनल में शानदार वापसी
दक्षिण कोरिया के असान स्थित यी सुन-सिन जिम्नेजियम में खेले गए फाइनल में अश्मिता ने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त हान कियान शी को तीन गेम तक चले मुकाबले में 14-21, 21-14, 21-14 से हराया। मैच 53 मिनट तक चला। पहला गेम गंवाने के बाद अश्मिता ने बेहतरीन वापसी की और अगले दोनों गेमों में आक्रामक तथा संयमित खेल दिखाया।
सेमीफाइनल से खिताब तक का सफर
अश्मिता ने खिताबी मुकाबले तक पहुंचने के लिए भी मजबूत प्रदर्शन किया। 8 अगस्त 2026 को हुए सेमीफाइनल में उन्होंने अपनी ही हमवतन रक्षिता रामराज को 21-13, 16-21, 21-13 से मात दी। इस जीत ने भारतीय महिला खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और देश की बैडमिंटन गहराई को भी सामने रखा।
चोट से वापसी और करियर की बड़ी उपलब्धि
यह उपलब्धि अश्मिता के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि वह 2024 के कोरिया ओपन में दाहिने घुटने में मेडियल मेनिस्कस की चोट के बाद सर्जरी और पुनर्वास से गुजरी थीं। चोट से उबरकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिताब जीतना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। गुवाहाटी, असम की यह बाएं हाथ की खिलाड़ी राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गुवाहाटी में कोच पार्क ते-सांग के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कोरिया मास्टर्स, BWF वर्ल्ड टूर सर्किट का हिस्सा है।
- BWF वर्ल्ड टूर सुपर 300, बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन की प्रतियोगिता संरचना का एक स्तर है।
- अश्मिता चालीहा गुवाहाटी, असम की बाएं हाथ की बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
- फाइनल मुकाबला दक्षिण कोरिया के असान स्थित यी सुन-सिन जिम्नेजियम में खेला गया।
इस जीत के साथ अश्मिता चालीहा ने भारतीय महिला बैडमिंटन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। चोट से वापसी के बाद मिला यह खिताब उनके आत्मविश्वास और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा का मजबूत संकेत है।