अली फालिह काधिम अल-जैदी बने इराक के नए प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 मई 2026 को अली फालिह काधिम अल-जैदी को इराक का नया प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी। अल-जैदी ने 14 मई 2026 को इराकी संसद के विशेष सत्र में शपथ ग्रहण कर पदभार संभाला। उनके नेतृत्व में नई सरकार का गठन ऐसे समय में हुआ है जब इराक लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और गठबंधन वार्ताओं के दौर से गुजर रहा था।
इराक की राजनीतिक व्यवस्था
इराक पश्चिम एशिया का एक संघीय संसदीय गणराज्य है। यहां प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है, जबकि राष्ट्रपति राष्ट्र प्रमुख की भूमिका निभाते हैं। इराक की संसद को काउंसिल ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स कहा जाता है, जो एकसदनीय विधायिका है और सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 2005 में नया संविधान लागू होने के बाद इराक ने संघीय संसदीय व्यवस्था को अपनाया। इसके बाद से सरकार गठन आमतौर पर विभिन्न राजनीतिक दलों और गठबंधनों के बीच सहमति के आधार पर होता है।
संसद में हुआ नई सरकार का गठन
इराक की संसद ने 14 मई 2026 को 14 मंत्रियों वाले आंशिक मंत्रिमंडल और सरकार के कार्यक्रम को मंजूरी दी। हालांकि कुछ मंत्रालयों पर सहमति नहीं बनने के कारण शेष पदों पर मतदान टाल दिया गया। इराक में मंत्रिमंडल गठन अक्सर विभिन्न राजनीतिक गुटों के बीच लंबी बातचीत और समझौते के बाद पूरा होता है। यही कारण है कि कई बार सरकार गठन की प्रक्रिया लंबी खिंच जाती है।
कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क की अहम भूमिका
अली फालिह काधिम अल-जैदी को अप्रैल 2026 में कोऑर्डिनेशन फ्रेमवर्क ने प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया था। यह इराक के प्रभावशाली शिया राजनीतिक दलों का गठबंधन है। उनकी उम्मीदवारी बगदाद में पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज के नेता फालिह अल-फय्याद के आवास पर हुई बैठकों और राजनीतिक चर्चाओं के बाद सामने आई। इस कदम को राजनीतिक गतिरोध समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया।
भारत-इराक संबंधों का महत्व
भारत और इराक के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बने हुए हैं। दोनों देश ऊर्जा, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग करते हैं। इराक भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण देशों में शामिल है। पश्चिम एशिया में बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी होने के कारण भी यह क्षेत्र भारत की विदेश नीति में विशेष महत्व रखता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
” इराक ने 2005 के संविधान के बाद संघीय संसदीय गणराज्य व्यवस्था अपनाई। ” इराक के प्रधानमंत्री सरकार और कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं। ” पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज की स्थापना 2014 में हुई थी। ” सोशल मीडिया मंच एक्स का पुराना नाम ट्विटर था। अली फालिह काधिम अल-जैदी का प्रधानमंत्री बनना इराक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। भारत ने भी इस अवसर पर नए नेतृत्व के साथ मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और सहयोग को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई है।