अंटार्कटिका में मिला पृथ्वी का सबसे पुराना बर्फ और वायु नमूना

अंटार्कटिका में मिला पृथ्वी का सबसे पुराना बर्फ और वायु नमूना

अंटार्कटिका में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों ने पृथ्वी का अब तक का सबसे पुराना प्रत्यक्ष रूप से दिनांकित बर्फ और वायु नमूना खोजने में सफलता हासिल की है। यह नमूना पूर्वी अंटार्कटिका के एलन हिल्स क्षेत्र से प्राप्त हुआ है और इसमें लगभग 60 लाख वर्ष पुराने बर्फ के भीतर फंसे सूक्ष्म वायु बुलबुले मौजूद हैं। वैज्ञानिकों ने इन नमूनों की आयु का निर्धारण आर्गन समस्थानिक विश्लेषण के माध्यम से किया।

एलन हिल्स क्षेत्र की विशेषता

एलन हिल्स पूर्वी अंटार्कटिका का ऐसा क्षेत्र है जो प्राचीन नीली बर्फ की परतों के लिए जाना जाता है। यहां प्राप्त बर्फ के नमूने में फंसी हुई हवा पृथ्वी के प्राचीन वातावरण की सीधी जानकारी देती है। यह अन्य जलवायु रिकॉर्ड से अलग है, क्योंकि वहां जानकारी अप्रत्यक्ष संकेतकों के आधार पर प्राप्त होती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस अध्ययन से पता चला है कि पिछले 60 लाख वर्षों में अंटार्कटिका में लगभग 12 डिग्री सेल्सियस तक दीर्घकालिक शीतलन हुआ है।

वैज्ञानिक संस्थानों की भूमिका

यह खोज नेशनल साइंस फाउंडेशन समर्थित सेंटर फॉर ओल्डेस्ट आइस एक्सप्लोरेशन यानी कोल्डेक्स से जुड़े वैज्ञानिकों की टीम ने की। इस शोध का नेतृत्व वुड्स होल ओशनोग्राफिक इंस्टीट्यूशन की सारा शैकलटन और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के जॉन हिगिंस ने किया। शोध के निष्कर्ष अक्टूबर 2025 में प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित किए गए थे। अध्ययन में फंसे वायु बुलबुलों के भीतर मौजूद आर्गन समस्थानिकों का विश्लेषण कर बर्फ की आयु निर्धारित की गई।

बियॉन्ड ईपिका परियोजना भी महत्वपूर्ण

यूरोपीय “बियॉन्ड ईपिका-ओल्डेस्ट आइस” परियोजना ने मई 2026 में अपना अंतिम अंटार्कटिक अभियान पूरा किया। इस परियोजना के तहत पूर्वी अंटार्कटिका के लिटिल डोम सी क्षेत्र से 2.8 किलोमीटर लंबा बर्फ का कोर निकाला गया। यह कोर लगभग 12 लाख वर्ष पुराना है और इसमें कार्बन डाइऑक्साइड तथा मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसों के बुलबुले मौजूद हैं। इस परियोजना में 10 यूरोपीय देशों की 14 प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

पृथ्वी की जलवायु समझने में मदद

बर्फ के कोर पृथ्वी की प्राचीन जलवायु और वातावरण का अध्ययन करने के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। वैज्ञानिक इन नमूनों के माध्यम से यह समझने का प्रयास करते हैं कि पृथ्वी की जलवायु लाखों वर्षों में कैसे बदली। यह अध्ययन विशेष रूप से मिड-प्लीस्टोसीन ट्रांजिशन को समझने में मदद करेगा। यह वह समय था जब पृथ्वी पर हिमयुग चक्रों की गति और स्वरूप में बड़ा बदलाव आया था।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

” अंटार्कटिका पृथ्वी का सबसे ठंडा महाद्वीप है। ” पृथ्वी के सबसे बड़े मीठे पानी के भंडार बर्फ के रूप में अंटार्कटिका में मौजूद हैं। ” आइस कोर बर्फ की बेलनाकार परतें होती हैं जिनसे प्राचीन जलवायु का अध्ययन किया जाता है। ” मिड-प्लीस्टोसीन ट्रांजिशन लगभग 12 लाख से 7 लाख वर्ष पहले हुआ था। अंटार्कटिका में मिला यह प्राचीन बर्फ और वायु नमूना पृथ्वी के जलवायु इतिहास को समझने की दिशा में बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भविष्य में जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापमान के दीर्घकालिक प्रभावों पर नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।

Originally written on May 18, 2026 and last modified on May 18, 2026.

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