अप्रैल 2026 में थोक महंगाई 42 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची
भारत में थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई अप्रैल 2026 में बढ़कर 8.3 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 14 मई 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में यह दर 3.88 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में यह तेज वृद्धि मुख्य रूप से ईंधन, ऊर्जा और विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में उछाल के कारण दर्ज की गई।
डब्ल्यूपीआई क्या है
थोक मूल्य सूचकांक भारत में थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में औसत बदलाव को मापता है। इसके माध्यम से प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन एवं ऊर्जा तथा विनिर्मित उत्पादों की कीमतों की स्थिति का आकलन किया जाता है। यह सूचकांक अर्थव्यवस्था में लागत दबाव और औद्योगिक मूल्य रुझानों को समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
ईंधन और ऊर्जा कीमतों में तेज बढ़ोतरी
अप्रैल 2026 में ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी की महंगाई बढ़कर 24.71 प्रतिशत हो गई, जबकि मार्च 2026 में यह केवल 1.05 प्रतिशत थी। कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई 67.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके साथ ही खनिज तेलों की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर भारत की आयात लागत पर भी पड़ा।
विनिर्माण क्षेत्र पर असर
विनिर्मित उत्पादों की महंगाई भी मार्च के 3.39 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 4.62 प्रतिशत हो गई। इसका प्रभाव रसायन, वस्त्र, मशीनरी और बेसिक मेटल जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में देखा गया। इन क्षेत्रों में उत्पादन लागत बढ़ने से औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ सकता है।
खुदरा महंगाई और रुपये की स्थिति
हालांकि खुदरा महंगाई यानी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अप्रैल 2026 में 3.48 प्रतिशत रही, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के आरामदायक लक्ष्य से नीचे है। दूसरी ओर भारतीय रुपये में कमजोरी भी दर्ज की गई। अप्रैल 2026 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.6 रहा, जबकि मार्च में यह 92.8 था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- डब्ल्यूपीआई भारत में थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव को मापने वाला सूचकांक है।
- भारतीय रिजर्व बैंक अपनी औपचारिक मुद्रास्फीति लक्ष्य प्रणाली में सीपीआई महंगाई का उपयोग करता है।
- ईंधन एवं ऊर्जा डब्ल्यूपीआई की प्रमुख श्रेणियों में शामिल है।
- विनिर्मित उत्पादों में रसायन, वस्त्र, मशीनरी और बेसिक मेटल जैसे क्षेत्र शामिल होते हैं।
अप्रैल 2026 के महंगाई आंकड़े संकेत देते हैं कि वैश्विक ऊर्जा कीमतों और मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आने वाले महीनों में सरकार और रिजर्व बैंक के लिए मूल्य स्थिरता बनाए रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती हो सकती है।