अटाकामा रेगिस्तान की सतह के नीचे मिला सूक्ष्मजीवों का पारिस्थितिकी तंत्र

अटाकामा रेगिस्तान की सतह के नीचे मिला सूक्ष्मजीवों का पारिस्थितिकी तंत्र

दुनिया के सबसे शुष्क गर्म रेगिस्तान माने जाने वाले चिली के अटाकामा रेगिस्तान में वैज्ञानिकों ने सतह से लगभग दो मीटर नीचे सूक्ष्मजीवों का एक जटिल पारिस्थितिकी तंत्र खोजा है। इस खोज में बैक्टीरिया, आर्किया और डीएनए आधारित सूक्ष्मजीवीय जीवन के प्रमाण मिले हैं। अटाकामा रेगिस्तान को लंबे समय से मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों वाला क्षेत्र माना जाता है, इसलिए यह खोज खगोलजीव विज्ञान यानी एस्ट्रोबायोलॉजी के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अटाकामा रेगिस्तान क्यों है खास

Atacama Desert उत्तरी चिली में स्थित है और इसे पृथ्वी का सबसे शुष्क गर्म रेगिस्तान माना जाता है। यहां अत्यधिक शुष्क जलवायु, तीव्र सौर विकिरण और मिट्टी में बहुत कम जैविक पदार्थ पाए जाते हैं। युंगाय घाटी जैसे क्षेत्र इस रेगिस्तान का हिस्सा हैं और इन्हें वैज्ञानिक पृथ्वी पर मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों के अध्ययन के लिए उपयोग करते हैं। यही कारण है कि अटाकामा को “मार्स एनालॉग” क्षेत्र भी कहा जाता है।

सतह के नीचे मिला जीवन

वैज्ञानिकों ने पाया कि रेगिस्तान की सतह के नीचे मिट्टी में नमी और तापमान की स्थिति ऊपरी परत से अलग होती है, जिससे सूक्ष्मजीवों के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। पहले के अध्ययनों में मुख्य रूप से मिट्टी की ऊपरी 30 सेंटीमीटर परत में सूक्ष्मजीव पाए गए थे, लेकिन बाद के शोधों ने यह दिखाया कि कुछ स्थानों पर जीवन के संकेत कम से कम चार मीटर गहराई तक मौजूद हैं। नई खोज ने यह प्रमाणित किया है कि अत्यंत कठोर वातावरण में भी जीवन टिक सकता है।

निमेटोड और सूक्ष्मजीवीय विविधता

University of Cologne के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में अटाकामा की मिट्टी के नीचे निमेटोड नामक सूक्ष्म गोलकृमियों के विविध समुदाय पाए गए। शोधकर्ताओं ने छह क्षेत्रों से 112 मिट्टी के नमूने एकत्र किए और इनमें 21 परिवारों से संबंधित कम से कम 36 वंशों की पहचान की। निमेटोड समुद्री, मीठे पानी और स्थलीय वातावरण में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव होते हैं।

एस्ट्रोबायोलॉजी में महत्व

एस्ट्रोबायोलॉजी वह विज्ञान है, जिसमें ब्रह्मांड में जीवन की उत्पत्ति, विकास और संभावित वितरण का अध्ययन किया जाता है। अटाकामा रेगिस्तान का उपयोग इस क्षेत्र में इसलिए किया जाता है क्योंकि इसकी शुष्क मिट्टी, नमक जमाव और विकिरण स्तर मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों से मेल खाते हैं। इस प्रकार की खोजें यह समझने में मदद करती हैं कि यदि पृथ्वी जैसे कठिन वातावरण में जीवन संभव है, तो अन्य ग्रहों पर भी सूक्ष्मजीवीय जीवन मौजूद हो सकता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अटाकामा रेगिस्तान चिली में स्थित है और पृथ्वी का सबसे शुष्क गर्म रेगिस्तान माना जाता है।
  • एक्टिनोबैक्टीरिया अत्यधिक वातावरण में पाए जाने वाले प्रमुख बैक्टीरिया समूहों में शामिल हैं।
  • निमेटोड सूक्ष्म गोलकृमि होते हैं, जो विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में पाए जाते हैं।
  • एस्ट्रोबायोलॉजी ब्रह्मांड में जीवन की उत्पत्ति और संभावनाओं का अध्ययन करने वाला विज्ञान है।

अटाकामा रेगिस्तान में सतह के नीचे मिले इस सूक्ष्मजीवीय पारिस्थितिकी तंत्र ने वैज्ञानिकों को यह समझने का नया अवसर दिया है कि जीवन अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी कैसे टिक सकता है। यह खोज भविष्य में मंगल ग्रह और अन्य खगोलीय पिंडों पर जीवन की संभावनाओं की खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

Originally written on May 7, 2026 and last modified on May 7, 2026.

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