अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026: देशभर में शुरू हुई बाघों की नई गणना

अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026: देशभर में शुरू हुई बाघों की नई गणना

भारत में बाघ संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अखिल भारतीय बाघ आकलन (ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन) 2026 का छठा चक्र जनवरी 2026 से शुरू हो गया है। यह देशव्यापी सर्वेक्षण बाघों की संख्या, उनके आवास की स्थिति तथा जैव विविधता का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए आयोजित किया जाता है। इस प्रक्रिया में फील्ड सर्वे, कैमरा ट्रैप और आनुवंशिक (डीएनए) नमूनों का उपयोग किया जाता है। इस व्यापक अभ्यास में वन विभाग के कर्मचारी, स्वयंसेवक और वन्यजीव विशेषज्ञ देशभर के बाघ आवास क्षेत्रों में भाग ले रहे हैं। अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2027 में जारी होने की संभावना है।

अखिल भारतीय बाघ आकलन की प्रक्रिया

अखिल भारतीय बाघ आकलन भारत में बाघों की स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने वाला सबसे बड़ा वन्यजीव सर्वेक्षण है। वर्ष 2022 में हुए पिछले आकलन में भारत में बाघों की अनुमानित संख्या 3,682 दर्ज की गई थी, जो विश्व की कुल जंगली बाघ आबादी का लगभग 75 प्रतिशत मानी गई। वर्ष 2026 का आकलन तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले चरण में जनवरी से फरवरी तक बाघों के पदचिह्न, मल-मूत्र, खरोंच जैसे संकेतों का सर्वेक्षण तथा उनके आवास का मूल्यांकन किया जाता है। दूसरे चरण में 40 से 60 दिनों तक कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं, जबकि तीसरे चरण में डीएनए विश्लेषण के लिए आनुवंशिक नमूने एकत्र किए जाते हैं। इन सभी तरीकों से प्राप्त आंकड़ों का संयुक्त विश्लेषण कर बाघों की वास्तविक संख्या और वितरण का अनुमान लगाया जाता है।

राज्यों में सर्वेक्षण की प्रगति

तमिलनाडु ने 5 जनवरी 2026 से अपने पांच बाघ अभयारण्यों में प्रथम चरण का सर्वेक्षण शुरू किया। वहीं कर्नाटक में 54 वन प्रभागों में लगभग 400 फील्ड कर्मियों और 550 कैमरा ट्रैप की सहायता से यह अभियान चलाया गया, जिसमें बांदीपुर टाइगर रिजर्व प्रमुख केंद्रों में शामिल है। तेलंगाना ने 19 से 25 जनवरी 2026 के बीच प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा किया, जिसमें बाघों और अन्य मांसाहारी जीवों से संबंधित 994 साक्ष्य दर्ज किए गए। अमराबाद टाइगर रिजर्व में नवंबर 2025 से जून 2026 तक 2,611 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में किए गए विस्तृत सर्वेक्षण में 2,240 कैमरा ट्रैप लगाए गए। इस अध्ययन में 42 अलग-अलग बाघों की पहचान हुई, जबकि पिछले सर्वेक्षण में यह संख्या 36 थी। इनमें 18 मादा, 14 नर, दो उप-वयस्क तथा आठ शावक शामिल पाए गए। कैमरा ट्रैप में भारतीय ग्रे वुल्फ भी दर्ज किया गया, जिसे वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारत में पिछला अखिल भारतीय बाघ आकलन वर्ष 2022 में किया गया था, जिसमें बाघों की अनुमानित संख्या 3,682 दर्ज की गई थी।
  • बाघ गणना के लिए संकेत सर्वेक्षण, कैमरा ट्रैप और आनुवंशिक (डीएनए) नमूनों का संयुक्त उपयोग किया जाता है।
  • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 भारत में वन्यजीवों और उनके आवासों की सुरक्षा के लिए प्रमुख कानून है।
  • बांदीपुर टाइगर रिजर्व कर्नाटक के सबसे महत्वपूर्ण बाघ अभयारण्यों में से एक है और देश के प्रमुख संरक्षण क्षेत्रों में गिना जाता है।

अखिल भारतीय बाघ आकलन 2026 न केवल देश में बाघों की वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक चित्र प्रस्तुत करेगा, बल्कि भविष्य की संरक्षण नीतियों को भी दिशा देगा। आधुनिक तकनीकों और व्यापक फील्ड सर्वेक्षण के माध्यम से यह अभियान भारत की जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत बनाता है।

Originally written on June 29, 2026 and last modified on June 29, 2026.

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