तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना को मिला नया सहयोग
बांग्लादेश की महत्वाकांक्षी तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। 24 से 26 जून 2026 के बीच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा की। यह परियोजना नदी प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण, भूमि पुनरुद्धार और आधारभूत ढांचे के विकास से जुड़ी है। इसके माध्यम से तीस्ता नदी के प्रवाह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने और आसपास के क्षेत्रों के विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है।
तीस्ता नदी का महत्व
तीस्ता नदी भारत और बांग्लादेश के बीच बहने वाली एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय नदी है। इसका उद्गम हिमालय क्षेत्र में होता है और यह सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह पूर्वी हिमालयी नदी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जल बंटवारे और नदी प्रबंधन को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कई वर्षों से चर्चा होती रही है, जिससे यह नदी रणनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
परियोजना की प्रमुख विशेषताएं
प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत लगभग 140 मिलियन घन मीटर नदी तलछट की ड्रेजिंग की जाएगी तथा लगभग 171 वर्ग किलोमीटर भूमि का पुनरुद्धार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त 110 किलोमीटर पुराने तटबंधों की मरम्मत, 124 किलोमीटर नए तटबंधों का निर्माण, 224 किलोमीटर लंबा सड़क नेटवर्क विकसित करने तथा 82 जेट्टी सुविधाओं के निर्माण का भी प्रस्ताव है। इन कार्यों का उद्देश्य बाढ़ नियंत्रण, नदी तट संरक्षण, परिवहन सुविधा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
चीन-बांग्लादेश सहयोग
चीन ने स्पष्ट किया है कि तीस्ता परियोजना में उसका सहयोग किसी तीसरे देश के विरुद्ध नहीं है। चीन का कहना है कि इस सहयोग को बाहरी कारकों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। साथ ही उसने जल संसाधन प्रबंधन में अपने अनुभव साझा करने और बांग्लादेश के जल विशेषज्ञों एवं अधिकारियों को चीन में प्रशिक्षण देने की भी पेशकश की है। यह सहयोग जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजना की पृष्ठभूमि
तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना का संबंध पहली बार वर्ष 2016 में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) से जुड़ा था। बाद में जनवरी 2026 में प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान इस समझौते का विस्तार किया गया। 25 जून 2026 को बांग्लादेश और चीन ने तीस्ता सहित अन्य नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। उल्लेखनीय है कि भारत ने वर्ष 2024 में तीस्ता बेसिन के संरक्षण और तकनीकी सहयोग की पेशकश भी की थी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- तीस्ता नदी एक अंतरराष्ट्रीय (ट्रांसबाउंड्री) नदी है, जो भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है।
- ट्रांसबाउंड्री नदी वह नदी होती है जो एक या अधिक देशों की सीमाओं को पार करती है।
- तीस्ता नदी के जल बंटवारे का मुद्दा भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से द्विपक्षीय चर्चा का विषय रहा है।
- वर्ष 2016 में इस परियोजना से संबंधित पहला समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया गया था, जबकि जनवरी 2026 में इसका विस्तार किया गया।
तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना केवल एक बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह जल संसाधन प्रबंधन, क्षेत्रीय विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी महत्वपूर्ण उदाहरण है। आने वाले वर्षों में इस परियोजना की प्रगति दक्षिण एशिया में नदी प्रबंधन और क्षेत्रीय कूटनीति के दृष्टिकोण से विशेष महत्व रखेगी।