ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी: प्रदूषित नदियों की सफाई में मददगार नई बैक्टीरिया प्रजाति

ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी: प्रदूषित नदियों की सफाई में मददगार नई बैक्टीरिया प्रजाति

भारत के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी (Brachybacterium netajii) नामक बैक्टीरिया की नई प्रजाति की पहचान की है। इस जीवाणु को पश्चिम बंगाल की हुगली नदी से अलग किया गया, जहां औद्योगिक अपशिष्ट के कारण प्रदूषण का स्तर अधिक पाया जाता है। वैज्ञानिकों ने बहुआयामी वर्गीकरण (पॉलीफेसिक टैक्सोनॉमिक कैरेक्टराइजेशन) के बाद इस नई प्रजाति को ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी स्पीशीज़ नोवा (sp. nov.) नाम दिया। इस प्रजाति का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सम्मान में रखा गया है।

ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी की विशेषताएं

ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसकी जैव-उपचार (बायोरिमेडिएशन) क्षमता है। बायोरिमेडिएशन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें सूक्ष्मजीव, पौधे या एंजाइम प्रदूषकों को कम हानिकारक पदार्थों में परिवर्तित करते हैं। यह बैक्टीरिया पी-नाइट्रोफेनॉल (पीएनपी) नामक विषैले औद्योगिक रसायन को विघटित कर हानिरहित उप-उत्पादों में बदल सकता है। पी-नाइट्रोफेनॉल का उपयोग मुख्य रूप से रंग (डाई) और कीटनाशकों के निर्माण में किया जाता है। इसके कारण यह जीवाणु औद्योगिक अपशिष्ट से प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई में उपयोगी साबित हो सकता है।

भारी धातुओं और लवणीय वातावरण में जीवित रहने की क्षमता

यह नई बैक्टीरिया प्रजाति आर्सेनिक, कैडमियम, सीसा और पारा जैसी भारी धातुओं की उच्च मात्रा को सहन करने में सक्षम है। इसके अतिरिक्त यह हेलोटॉलरेंट है, अर्थात यह 9 प्रतिशत तक लवणता वाले वातावरण में भी जीवित रह सकती है। यही कारण है कि इसे तटीय क्षेत्रों, मुहाना (एस्चुरी) तथा अधिक लवणीय जल वाले प्रदूषित क्षेत्रों की सफाई के लिए उपयोगी माना जा रहा है। इसके जीनोम में ऐसे जीनोमिक द्वीप (जीनोमिक आइलैंड्स) पाए गए हैं, जो तनाव-सहनशील एंजाइमों से जुड़े हैं। यही विशेषता इसे कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी सक्रिय बनाए रखती है।

वर्गीकरण और अनुसंधान का महत्व

ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी एक्टिनोबैक्टीरिया संघ (फाइलम) के अंतर्गत आने वाले ब्रैकीबैक्टीरियम वंश का सदस्य है। इसकी कोशिकाओं में C11:0 तथा C10:0 2-OH जैसे विशिष्ट फैटी एसिड पाए गए हैं, जो इसकी पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस जीवाणु की खोज नेताजी महाविद्यालय, बर्धमान विश्वविद्यालय, आईआईटी (बीएचयू) तथा जापान के हिरोशिमा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के संयुक्त अनुसंधान से संभव हुई। यह खोज प्रदूषित जल स्रोतों की सफाई के लिए पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी की खोज पश्चिम बंगाल की हुगली नदी में की गई, जो गंगा नदी की प्रमुख वितरिका है।
  • पी-नाइट्रोफेनॉल का उपयोग मुख्य रूप से रंगों और कीटनाशकों के निर्माण में किया जाता है।
  • हेलोटॉलरेंट जीव वे सूक्ष्मजीव होते हैं, जो अधिक लवणता वाले वातावरण में भी जीवित रह सकते हैं।
  • एक्टिनोबैक्टीरिया बैक्टीरिया का एक प्रमुख संघ है, जिसमें अनेक मिट्टी में रहने वाले और औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण सूक्ष्मजीव शामिल हैं।

ब्रैकीबैक्टीरियम नेताजी की खोज पर्यावरण संरक्षण और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि है। प्रदूषित नदियों, औद्योगिक अपशिष्ट और भारी धातुओं से प्रभावित जल स्रोतों की सफाई में इस बैक्टीरिया का भविष्य में व्यापक उपयोग संभव है। यह खोज सतत विकास और स्वच्छ पर्यावरण की दिशा में सूक्ष्मजीव विज्ञान की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।

Originally written on June 29, 2026 and last modified on June 29, 2026.

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