अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स और अपार: भारत की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स और अपार: भारत की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव

भारत की नई शिक्षा नीति 2020 के तहत उच्च शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए कई डिजिटल पहल शुरू की गई हैं। इनमें अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) और ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) प्रमुख हैं। इन दोनों प्रणालियों का उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखना, क्रेडिट ट्रांसफर को आसान बनाना तथा देशभर में शिक्षा व्यवस्था को एकीकृत करना है।

अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स की भूमिका

अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स एक डिजिटल भंडार है, जिसमें मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थानों से अर्जित शैक्षणिक क्रेडिट सुरक्षित रखे जाते हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से छात्र अपने क्रेडिट को संग्रहित, स्थानांतरित और आवश्यकता अनुसार उपयोग कर सकते हैं। इससे विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के बीच पढ़ाई जारी रखना पहले की तुलना में अधिक आसान हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने वर्ष 2025 के शैक्षणिक सत्र से संबंधित छात्रों के क्रेडिट रिकॉर्ड को 30 जून 2026 तक एबीसी पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। इससे पहले भी 2021 से 2024 तक के शैक्षणिक रिकॉर्ड अपलोड करने के लिए अलग-अलग समय-सीमाएँ निर्धारित की गई थीं।

अपार आईडी और डिजिटल छात्र पहचान

अपार अर्थात ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री, प्रत्येक छात्र को प्रदान की जाने वाली 12 अंकों की स्थायी डिजिटल पहचान संख्या है। यह “वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी” पहल का हिस्सा है और डिजिलॉकर से जुड़ी हुई है। इसके माध्यम से स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाता है। जून 2026 तक देशभर में 26.30 करोड़ से अधिक सत्यापित अपार आईडी बनाई जा चुकी थीं। वहीं, गोवा में लगभग 81.1 प्रतिशत स्कूली छात्रों के लिए अपार आईडी तैयार की गई, जहाँ 2.89 लाख नामांकित विद्यार्थियों में से 2.35 लाख छात्रों की आईडी बनाई गई।

मल्टीपल एंट्री और एग्जिट प्रणाली

नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मल्टीपल एंट्री और एग्जिट प्रणाली लागू की गई है, जिसे एबीसी ढाँचे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इस व्यवस्था के तहत छात्र अपनी पढ़ाई के विभिन्न चरणों पर अलग-अलग शैक्षणिक प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर बाद में पुनः उसी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेकर अपनी शिक्षा जारी रख सकते हैं। 1 जुलाई 2026 तक 153 विश्वविद्यालय इस व्यवस्था को अपना चुके थे। इसके अंतर्गत 31,000 से अधिक स्नातक तथा लगभग 5,500 स्नातकोत्तर छात्र लाभान्वित हो रहे थे। इसके अलावा छात्र स्वयम ऑनलाइन शिक्षण मंच के माध्यम से कुल शैक्षणिक क्रेडिट का 40 प्रतिशत तक अर्जित कर सकते हैं।

कार्यान्वयन और चुनौतियाँ

30 जून 2026 तक एबीसी प्लेटफॉर्म पर 2,963 संस्थान पंजीकृत हो चुके थे तथा 110.65 करोड़ से अधिक शैक्षणिक रिकॉर्ड अपलोड किए जा चुके थे। हालांकि, अपार आईडी के निर्माण में आधार लिंकिंग, जनसांख्यिकीय जानकारी में असंगति तथा तकनीकी त्रुटियों जैसी कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं, जिनके समाधान पर लगातार कार्य किया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एबीसी का पूरा नाम अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स है और यह उच्च शिक्षा के शैक्षणिक क्रेडिट का डिजिटल भंडार है।
  • अपार का पूरा नाम ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री है, जिसमें प्रत्येक छात्र को 12 अंकों की स्थायी पहचान संख्या दी जाती है।
  • स्वयम भारत सरकार का ऑनलाइन शिक्षण मंच है, जिसके माध्यम से छात्र एबीसी व्यवस्था के तहत 40 प्रतिशत तक शैक्षणिक क्रेडिट अर्जित कर सकते हैं।
  • नई शिक्षा नीति 2020 ने क्रेडिट ट्रांसफर, अकादमिक लचीलापन तथा मल्टीपल एंट्री और एग्जिट प्रणाली को नीति स्तर पर लागू करने का आधार प्रदान किया।

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एबीसी और अपार जैसी डिजिटल पहलें छात्रों को अधिक लचीली, आधुनिक और पारदर्शी शैक्षणिक सुविधाएँ उपलब्ध करा रही हैं। इन प्रणालियों के माध्यम से न केवल शैक्षणिक रिकॉर्ड का सुरक्षित डिजिटल प्रबंधन संभव हुआ है, बल्कि छात्रों को संस्थानों के बीच सहज क्रेडिट ट्रांसफर, पुनः प्रवेश और ऑनलाइन शिक्षा के बेहतर अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं। आने वाले वर्षों में इन पहलों से देश की उच्च शिक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ तथा तकनीक-सक्षम बनाने की उम्मीद है।

Originally written on July 1, 2026 and last modified on July 1, 2026.

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