बायोटेक निवेश को रफ्तार देने के लिए BIO-NIVESH की शुरुआत
भारत में जैव प्रौद्योगिकी को प्रयोगशाला से बाजार तक ले जाने और निजी निवेश से जोड़ने के लिए BIO-NIVESH नामक एक रणनीतिक मंच की शुरुआत की गई है। 3 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे लॉन्च किया। यह पहल जैव प्रौद्योगिकी विभाग और बायोटेक्नोलॉजी इंडस्ट्री रिसर्च असिस्टेंस काउंसिल (BIRAC) की संयुक्त कोशिश है, जिसका उद्देश्य नवाचार, निवेश और व्यावसायीकरण के बीच की दूरी कम करना है।
लैब से बाजार तक का पुल
BIO-NIVESH को ऐसे मंच के रूप में तैयार किया गया है, जहां जैव प्रौद्योगिकी के नवप्रवर्तक सीधे निवेशकों से जुड़ सकें। अक्सर शोध स्तर पर तैयार तकनीकें आगे बढ़ने के लिए पूंजी, उद्योग संपर्क और बाजार की समझ की मांग करती हैं। यह मंच उसी कमी को पूरा करने की दिशा में एक संस्थागत प्रयास है।
इसकी शुरुआत एक संयुक्त राउंडटेबल सम्मेलन के दौरान हुई, जिसमें 20 से अधिक बायोटेक और डीप-टेक स्टार्टअप तथा लगभग 50 निजी निवेशक शामिल हुए। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार अब बायोटेक स्टार्टअप इकोसिस्टम को केवल शोध तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे व्यावसायिक विस्तार की दिशा में ले जाना चाहती है।
भारत के बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए क्यों अहम
भारत में बायोटेक स्टार्टअप स्वास्थ्य, कृषि, औद्योगिक जैव प्रौद्योगिकी और बायो-मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में तकनीक का मूल्यांकन केवल वैज्ञानिक क्षमता से नहीं, बल्कि बौद्धिक संपदा, तकनीकी परिपक्वता और बाजार में उपयोगिता जैसे मानकों पर भी होता है। BIO-NIVESH ऐसे ही निवेश-उन्मुख मूल्यांकन को आसान बनाने का प्रयास है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर “Big Five in Five Years” जैसी सोच का उल्लेख किया, जिसके तहत पांच बड़े एंकर बायोटेक्नोलॉजी कंपनियों के निर्माण की परिकल्पना की गई है। उनका संदेश यह था कि भारत को अगली जैव प्रौद्योगिकी-आधारित औद्योगिक क्रांति में देर नहीं करनी चाहिए, जैसा सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में कई बार महसूस किया गया।
नीतिगत ढांचे और फंडिंग से जुड़ी भूमिका
BIRAC को केंद्र सरकार के Research, Development and Innovation Fund के लिए सेकेंड-लेवल फंड मैनेजर बनाया गया है। इस फंड का आकार 1 लाख करोड़ रुपये है और इसका उद्देश्य शोध-आधारित नवाचार को वित्तीय सहारा देना है। यह व्यवस्था बताती है कि सरकार अब केवल अनुदान आधारित मॉडल से आगे बढ़कर नवाचार के लिए पूंजी उपलब्ध कराने की अधिक संरचित प्रणाली बना रही है।
BIO-NIVESH को एक बार की घटना नहीं, बल्कि अलग-अलग शहरों में होने वाली सतत पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे क्षेत्रीय बायोटेक इकोसिस्टम को राष्ट्रीय निवेश नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- BIRAC एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है, जिसे बायोटेक नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है।
- Research, Development and Innovation Fund का आकार 1 लाख करोड़ रुपये है।
- जैव प्रौद्योगिकी में आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैव रसायन और जैव अभियांत्रिकी जैसे क्षेत्र शामिल होते हैं।
कुल मिलाकर BIO-NIVESH भारत के बायोटेक स्टार्टअप्स को निवेशकों से जोड़ने और शोध को व्यावसायिक सफलता में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह मंच नियमित और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ता है, तो देश के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र को नई गति मिल सकती है।