AK-203 के लिए स्वदेशी गोला-बारूद आपूर्ति से आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा

AK-203 के लिए स्वदेशी गोला-बारूद आपूर्ति से आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को बढ़ावा

अदाणी डिफेन्स एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ पांच साल का समझौता किया है, जिसके तहत AK-203 असॉल्ट राइफल कार्यक्रम के लिए स्वदेशी 7.62×39 मिमी छोटे कैलिबर के गोला-बारूद की आपूर्ति की जाएगी। यह करार भारत में बनी राइफल और भारत में ही निर्मित गोला-बारूद के बीच सीधा औद्योगिक जुड़ाव बनाता है, जिससे रक्षा उत्पादन में स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

AK-203 कार्यक्रम क्यों अहम है

AK-203 एक 7.62×39 मिमी असॉल्ट राइफल है, जिसका उत्पादन उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा स्थित इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के संयंत्र में किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय ने 6 दिसंबर 2021 को इसी कंपनी के साथ 6,01,427 AK-203 राइफलों के लिए अनुबंध किया था। अब गोला-बारूद की घरेलू आपूर्ति के लिए हुआ यह समझौता कार्यक्रम को अधिक व्यावहारिक और आत्मनिर्भर बनाता है।

कानपुर से आएगा गोला-बारूद

इस समझौते के तहत आवश्यक 7.62×39 मिमी गोला-बारूद का निर्माण अदाणी डिफेन्स अपने कानपुर, उत्तर प्रदेश स्थित छोटे कैलिबर गोला-बारूद उत्पादन केंद्र में करेगी। इससे AK-203 प्लेटफॉर्म के लिए आयात पर निर्भरता घटेगी और भारतीय सशस्त्र बलों को देश में ही निर्मित हथियार-गोला-बारूद का समन्वित स्रोत मिलेगा।

भारत-रूस रक्षा सहयोग की औद्योगिक कड़ी

इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड का गठन 2019 में भारत-रूस अंतर-सरकारी समझौते के तहत किया गया था। इसके भारतीय शेयरधारक एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड हैं, जबकि रूसी पक्ष से रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और कंसर्न कलाश्निकोव जुड़े हैं। यह ढांचा दिखाता है कि भारत अब संयुक्त रक्षा परियोजनाओं को केवल खरीद तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि उत्पादन और आपूर्ति दोनों को देश के भीतर विकसित कर रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • AK-203, कलाश्निकोव राइफल परिवार का एक संस्करण है और यह 7.62×39 मिमी कारतूस का उपयोग करती है।
  • इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 2019 के भारत-रूस अंतर-सरकारी समझौते के तहत हुई थी।
  • IRRPL के भारतीय शेयरधारक एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड हैं।
  • IRRPL के रूसी शेयरधारक रोसोबोरोनएक्सपोर्ट और कंसर्न कलाश्निकोव हैं।

यह समझौता रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है, क्योंकि इससे हथियार और उनके लिए जरूरी गोला-बारूद, दोनों का उत्पादन देश में ही सुदृढ़ होगा।

Originally written on September 5, 2026 and last modified on September 5, 2026.

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