ड्रोगो-एमआईएल साझेदारी से स्वदेशी यूएवी और लोइटरिंग म्यूनिशन को बढ़ावा
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूती देने की दिशा में ड्रोगो एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL) ने पुणे में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह साझेदारी मानवरहित हवाई प्रणालियों और लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम के डिजाइन, विकास, एकीकरण और परीक्षण से जुड़ी है।
क्या है इस समझौते का दायरा
यह MoU केवल औपचारिक सहयोग का ढांचा तय करता है, जिसके तहत दोनों पक्ष स्वदेशी UAV प्लेटफॉर्म और उनसे जुड़े हथियार-प्रणाली समाधान पर मिलकर काम करेंगे। इसमें सुरक्षा मूल्यांकन, फील्ड ट्रायल, रेंज ट्रायल और गुणवत्ता प्रमाणन जैसे चरण शामिल हैं। रक्षा क्षेत्र में ऐसे समझौते इसलिए अहम माने जाते हैं क्योंकि वे निजी कंपनियों और सरकारी रक्षा इकाइयों की विशेषज्ञता को एक ही परियोजना में जोड़ते हैं।
ड्रोगो और MIL की भूमिका
हैदराबाद स्थित ड्रोगो एयरोस्पेस UAV प्लेटफॉर्म और खाली-पेलोड हार्डवेयर के डिजाइन, विकास और निर्माण में काम करती है। दूसरी ओर, म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड मुनिशन डिजाइन, विस्फोटक प्रणालियों, पेलोड फिलिंग, फ्यूजिंग और मॉड्यूलर म्यूनिशन विकास में योगदान देगी। यही क्षमताएं किसी UAV को हथियार-युक्त प्लेटफॉर्म में बदलने के लिए जरूरी होती हैं।
इस समझौते पर ड्रोगो एयरोस्पेस के संस्थापक एवं सीईओ यशवंत बोनथु और MIL के कार्यकारी निदेशक कुमार वैभव गौर ने हस्ताक्षर किए।
लोइटरिंग म्यूनिशन और आधुनिक युद्ध प्रणाली
लोइटरिंग म्यूनिशन को रक्षा शब्दावली में “वन-वे अटैक सिस्टम” भी कहा जाता है। यह ऐसा हथियार है जो कुछ समय तक हवा में मंडरा सकता है और उपयुक्त लक्ष्य मिलने पर उस पर प्रहार करता है। UAV यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल ऐसा विमान होता है जिसमें मानव पायलट नहीं होता और इसका उपयोग निगरानी, टोही या हमले जैसे कार्यों में किया जा सकता है।
इस सहयोग में ड्रोगो का स्वदेशी डेल्टा विंग कामिकेज UAV भी शामिल है, जिसका परीक्षण हैदराबाद में किया गया है। इसे लंबी दूरी की रक्षा जरूरतों के लिए विकसित किया जा रहा एक वन-वे सिस्टम बताया गया है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Munitions India Limited की स्थापना 2021 में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के पुनर्गठन के बाद पुणे में हुई थी।
- ड्रोगो एयरोस्पेस और MIL के बीच MoU पर 4 सितंबर 2026 को पुणे में हस्ताक्षर हुए।
- लोइटरिंग म्यूनिशन को रक्षा क्षेत्र में वन-वे अटैक सिस्टम भी कहा जाता है।
- डेल्टा विंग कामिकेज UAV को 1,000 किमी तक की प्रस्तावित रेंज और 20 से 30 किलोग्राम वारहेड क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है।
यह साझेदारी दिखाती है कि भारत में रक्षा निर्माण अब केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वदेशी ड्रोन, म्यूनिशन और उन्नत अनमैन्ड सिस्टम की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।