यूएन मानचित्र सुधार प्रस्ताव पर भारत का रुख क्यों अहम है
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को ‘Correct the Map’ प्रस्ताव पारित कर विश्व मानचित्रों में होने वाली विकृतियों पर ध्यान खींचा। भारत ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि उसका समर्थन किसी एक खास मानचित्र पद्धति, खासकर ‘Equal Earth’ तक सीमित नहीं है। भारत ने कहा कि वह सामान्य रूप से समान-क्षेत्रफल वाले मानचित्रों के विचार का समर्थन करता है, जबकि देशों और संस्थानों को अपनी जरूरत के अनुसार उपयुक्त प्रक्षेपण चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
मानचित्रों में विकृति का सवाल क्या है
यह प्रस्ताव वैश्विक कार्टोग्राफी यानी मानचित्र-निर्माण में लंबे समय से चली आ रही उस समस्या से जुड़ा है, जिसमें कुछ प्रक्षेपण पृथ्वी के आकार और क्षेत्रफल को वास्तविकता से अलग दिखाते हैं। सबसे चर्चित उदाहरण मर्केटर प्रक्षेपण है, जो 16वीं शताब्दी में विकसित हुआ था और आज भी नौवहन तथा समुद्री मानचित्रों में उपयोगी माना जाता है। यह दिशा और स्थानीय आकार को बनाए रखता है, लेकिन भूमध्य रेखा से दूर जाते-जाते क्षेत्रफल को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाता है।
इसी कारण अफ्रीका जैसे बड़े महाद्वीप कई मानचित्रों में अपेक्षाकृत छोटे दिखते हैं, जबकि ग्रीनलैंड जैसे क्षेत्र वास्तविकता से कहीं अधिक बड़े प्रतीत होते हैं। इसी तरह दक्षिण एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे भूमध्यरेखीय क्षेत्र कई पारंपरिक विश्व मानचित्रों में अपने वास्तविक भू-क्षेत्र से छोटे नजर आते हैं।
भारत ने समर्थन के साथ क्या शर्त जोड़ी
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अपने वक्तव्य में यह रेखांकित किया कि मानचित्र प्रक्षेपण के मामले में तकनीकी और पद्धतिगत तटस्थता बनी रहनी चाहिए। भारत के अनुसार, देशों, संस्थानों और कार्टोग्राफरों को अपनी जरूरत, उद्देश्य और उपयोग के आधार पर प्रक्षेपण चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
भारत की यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि उसने एक ओर मानचित्रों में क्षेत्रफल की समानता के सिद्धांत का समर्थन किया, तो दूसरी ओर किसी एक मॉडल को अनिवार्य मानक बनाने का विरोध किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत की ओर से 5 सितंबर 2026 को स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने यह रुख रखा।
संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव को कितना समर्थन मिला
यह प्रस्ताव टोगो द्वारा प्रायोजित था और अफ्रीकी संघ का भी इसे समर्थन मिला। महासभा में इसे 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया। छह देशों—एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन—ने मतदान से दूरी बनाई।
यह घटनाक्रम केवल तकनीकी मानचित्र बहस नहीं है, बल्कि इस बात की भी याद दिलाता है कि वैश्विक दृष्टिकोण, भू-राजनीतिक प्रतिनिधित्व और शिक्षा सामग्री में मानचित्रों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र महासभा संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श करने वाला निकाय है और इसके 193 सदस्य देश हैं।
- मर्केटर प्रक्षेपण नौवहन और समुद्री मानचित्रों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला बेलनाकार मानचित्र प्रक्षेपण है।
- समान-क्षेत्रफल वाले प्रक्षेपण मानचित्र पर भू-भागों के वास्तविक क्षेत्रफल का अनुपात बनाए रखते हैं।
- Equal Earth आधुनिक समान-क्षेत्रफल विश्व मानचित्र प्रक्षेपणों में से एक है।
भारत का रुख यह दिखाता है कि मानचित्र सुधार की बहस में संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है—जहां क्षेत्रफल की सटीकता भी रहे और व्यावहारिक जरूरतों के अनुसार विकल्प भी खुले रहें।