संयुक्त राष्ट्र ने बाल विवाह उन्मूलन के लिए 27 नवंबर को तय किया विशेष दिवस
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को हर वर्ष बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह कदम दुनिया भर में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता, नीति-समन्वय और जन-समर्थन को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। प्रस्ताव 193 सदस्यीय महासभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ और इसे सिएरा लियोन की फर्स्ट लेडी तथा अफ्रीकी प्रथम महिलाओं के विकास संगठन की अध्यक्ष डॉ. फातिमा मादा बायो ने प्रस्तुत किया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला
संयुक्त राष्ट्र द्वारा किसी मुद्दे पर विशेष दिवस घोषित करना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं होता, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर उस समस्या की गंभीरता को स्वीकार करने और उसके समाधान के लिए साझा प्रयासों को गति देने का माध्यम भी होता है। बाल विवाह, कम उम्र में विवाह और जबरन विवाह मानवाधिकार, बाल संरक्षण और लैंगिक समानता से जुड़े गंभीर मुद्दे हैं।
अंतरराष्ट्रीय परिभाषा के अनुसार, बाल विवाह वह है जिसमें विवाह या अनौपचारिक संबंध में शामिल कम-से-कम एक व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु का हो। कम उम्र में विवाह अपेक्षाकृत व्यापक शब्द है, जबकि जबरन विवाह वह संबंध है जिसमें पूर्ण और स्वतंत्र सहमति नहीं होती।
भारत के लिए इसका क्या अर्थ है
भारत में बाल विवाह के खिलाफ अभियान पहले से चल रहा है। केंद्र सरकार ने 27 नवंबर 2024 को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान शुरू किया था। अब संयुक्त राष्ट्र का नया दिवस भी उसी तारीख पर पड़ता है, जिससे यह दिन भारत में चल रहे अभियान के साथ वैश्विक स्तर पर भी और अधिक प्रासंगिक हो गया है।
बाल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय संगठन और कार्यकर्ता भी इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाने में सक्रिय रहे हैं। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु इस विशेष दिवस की वकालत से जुड़े रहे और संयुक्त राष्ट्र की कार्यवाही में भी शामिल हुए।
असम में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। राज्य ने हजारों मामले दर्ज किए हैं और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुई हैं। राज्य सरकार ने 20 जिलों में बाल विवाह में उल्लेखनीय गिरावट का दावा भी किया है।
वैश्विक स्थिति और हालिया रुझान
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष यानी UNFPA के अनुसार, दुनिया में लगभग 64 करोड़ जीवित महिलाएं और लड़कियां बचपन में विवाह कर चुकी हैं। संस्था का यह भी कहना है कि हर साल करीब 1.2 करोड़ लड़कियों की शादी 18 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है। ये आंकड़े बताते हैं कि यह समस्या अभी भी बड़े पैमाने पर मौजूद है और केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव से भी इसका समाधान जरूरी है।
भारत में भी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े सुधार की ओर इशारा करते हैं। NFHS-5 में 20-24 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में 18 वर्ष से पहले विवाह का अनुपात 23.3% था, जो NFHS-6 में घटकर 20.1% रह गया। यह गिरावट सकारात्मक है, लेकिन समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में कुल 193 सदस्य देश हैं।
- 27 नवंबर को अब हर साल बाल, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा।
- UNFPA संयुक्त राष्ट्र की वह एजेंसी है जो जनसंख्या और यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर काम करती है।
- भारत में बाल विवाह से संबंधित प्रमुख कानून प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट, 2006 है।
यह निर्णय बाल विवाह के खिलाफ वैश्विक अभियान को नई पहचान देता है और भारत जैसे देशों के लिए भी नीति, जागरूकता और सामाजिक सुधार की दिशा में एक अतिरिक्त अवसर बनाता है।