UPI पर MDR लौटाने की तैयारी, डिजिटल भुगतान मॉडल में बदलाव के संकेत
केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था के वित्तीय ढांचे को मजबूत करने के लिए एक अहम प्रस्ताव रखा है। वित्त मंत्रालय ने 3 अगस्त 2026 को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन का प्रस्ताव दिया, जिसके तहत चुनिंदा डिजिटल भुगतान माध्यमों पर फिर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू किया जा सकता है। अभी कानून की धारा 10A के तहत UPI और RuPay डेबिट कार्ड जैसे ऑनलाइन लेनदेन पर शून्य MDR की व्यवस्था है।
क्या है प्रस्ताव और क्यों चर्चा में है
प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य शून्य MDR प्रावधान को हटाना है, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली के लिए एक स्थायी राजस्व मॉडल बनाया जा सके। सरकार का तर्क है कि UPI के तेज विस्तार और बढ़ते लेनदेन वॉल्यूम को देखते हुए इस इकोसिस्टम के संचालन और विस्तार के लिए वित्तीय संसाधनों की जरूरत है। इसी वजह से MDR को फिर से चुनिंदा लेनदेन पर लागू करने की बात सामने आई है। MDR वह शुल्क होता है जो व्यापारी अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को कार्ड या डिजिटल लेनदेन की प्रोसेसिंग के बदले देता है। भारत में यह शुल्क पहले डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों में लिया जाता रहा है। लेकिन डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2020 में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर MDR समाप्त कर दिया गया था।
किस पर असर, किसे राहत
प्रस्तावित व्यवस्था मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों पर लागू होने की संभावना है। कुछ संदर्भों के अनुसार, जिन व्यापारियों का वार्षिक टर्नओवर 50 करोड़ रुपये से अधिक है या जिनके लेनदेन 2,000 रुपये से ऊपर हैं, वे इसके दायरे में आ सकते हैं। दूसरी ओर, उपभोक्ताओं और 1.5 करोड़ रुपये तक के वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे व्यापारियों को छूट मिलने की उम्मीद है। UPI भुगतान पर प्रस्तावित MDR 0.5% से अधिक नहीं होने की बात कही जा रही है। इसका मतलब यह है कि छोटे कारोबारियों और आम उपयोगकर्ताओं पर सीधा बोझ डालने के बजाय बड़े व्यापारिक लेनदेन को लक्षित किया जा सकता है।
UPI की बढ़ती भूमिका और नीति की पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब UPI देश की भुगतान व्यवस्था का सबसे बड़ा डिजिटल माध्यम बन चुका है। जुलाई 2026 में UPI लेनदेन 29.9 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गए और उसी महीने 23 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। इतनी बड़ी मात्रा में लेनदेन के बावजूद शून्य MDR मॉडल को लेकर लंबे समय से बहस चल रही थी। मार्च 2026 में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि MDR के अभाव में UPI इकोसिस्टम वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं रह सकता। इसी पृष्ठभूमि में सरकार अब भुगतान प्रणाली के लिए नया संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है, जिसमें डिजिटल भुगतान की रफ्तार भी बनी रहे और उसका आर्थिक आधार भी मजबूत हो।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- धारा 10A, भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में कुछ डिजिटल लेनदेन पर शून्य MDR का प्रावधान है।
- UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने बैंक-से-बैंक त्वरित भुगतान के लिए विकसित किया था।
- RuPay भारत का घरेलू कार्ड नेटवर्क है, जिसे भी NPCI ने विकसित किया है।
- MDR आमतौर पर लेनदेन मूल्य के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है।
अब निगाहें संसद में आने वाले Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पर हैं, जिसके जरिए इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सकता है। यदि संशोधन पारित होता है, तो भारत की डिजिटल भुगतान नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।