2031-32 तक 874 GW क्षमता का लक्ष्य, भारत की बिजली व्यवस्था में बड़ा विस्तार
भारत की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 2031-32 तक 874 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। 30 जून 2026 तक देश की कुल स्थापित क्षमता 548,858 मेगावाट यानी लगभग 548.86 गीगावाट थी। इस अवधि में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18% रही, जो 2030 के लिए तय राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान लक्ष्य 50% से अधिक है।
बिजली क्षमता बढ़ाने की व्यापक योजना
स्थापित क्षमता का अर्थ है वह अधिकतम बिजली, जो उत्पादन इकाइयां किसी समय उपलब्ध करा सकती हैं। भारत की क्षमता संरचना में तापीय, जलविद्युत, परमाणु, सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय स्रोत शामिल हैं। 2031-32 तक की विस्तार योजना केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भंडारण और ट्रांसमिशन अवसंरचना को भी समान महत्व दिया गया है।यह विस्तार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में बिजली मांग लगातार बढ़ रही है और नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ग्रिड को अधिक लचीला और मजबूत बनाना जरूरी हो गया है।
तापीय, जलविद्युत और परमाणु क्षमता पर भी जोर
योजना के तहत 2031-32 तक कम से कम 80 गीगावाट कोयला आधारित तापीय क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच 21,080 मेगावाट कोयला आधारित क्षमता चालू की गई, जबकि 47,545 मेगावाट क्षमता निर्माणाधीन रही। तापीय बिजली अभी भी राष्ट्रीय ग्रिड को स्थिर आधारभूत आपूर्ति देने में अहम भूमिका निभाती है।इसके साथ ही जलविद्युत और परमाणु क्षेत्रों में भी विस्तार की तैयारी है, ताकि बिजली आपूर्ति का मिश्रण अधिक संतुलित रहे और मौसम पर निर्भर नवीकरणीय स्रोतों के साथ सिस्टम की विश्वसनीयता बनी रहे।
भंडारण और ट्रांसमिशन नेटवर्क से मजबूत होगी ग्रिड
नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी के साथ ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं की भूमिका भी बढ़ गई है। 3 अगस्त 2026 तक 15,870 मेगावाट की पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं और 15,754 मेगावाट की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियां निर्माणाधीन थीं। ये परियोजनाएं सौर और पवन जैसी परिवर्ती बिजली को संतुलित करने में मदद करती हैं।सरकार 2022-23 से 2031-32 के बीच लगभग 191,474 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनें और 1,274 जीवीए ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जोड़ने की भी योजना बना रही है। इससे बिजली को उत्पादन केंद्रों से उपभोक्ता क्षेत्रों तक अधिक कुशलता से पहुंचाया जा सकेगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत की स्थापित बिजली क्षमता 30 जून 2026 तक 548.86 गीगावाट थी।
- गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों की हिस्सेदारी 54.18% रही, जो 2030 के एनडीसी लक्ष्य से अधिक है।
- एटी एंड सी हानियां FY21 में 21.91% से घटकर FY25 में 15.04% रह गईं।
- ट्रांसमिशन लाइनें सर्किट किलोमीटर में और ट्रांसफॉर्मेशन क्षमता जीवीए में मापी जाती है।
कुल मिलाकर, 2031-32 तक 874 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य भारत के बिजली क्षेत्र में उत्पादन, भंडारण और ग्रिड आधुनिकीकरण—तीनों स्तरों पर बड़े बदलाव का संकेत देता है।