GIFT IFSC बना अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग गतिविधियों का नया केंद्र
गुजरात के GIFT IFSC में बैंकिंग गतिविधियों का दायरा तेजी से बढ़ा है। External Commercial Borrowings, FCNR(B) swap mobilisations और अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड लिस्टिंग के जरिए यह केंद्र अब भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मंच के रूप में उभर रहा है। International Financial Services Centres Authority (IFSCA) के अनुसार, घरेलू और विदेशी International Banking Units (IBUs) ने RBI की विशेष swap सुविधा के तहत बड़े पैमाने पर भागीदारी की है।
GIFT IFSC क्यों बन रहा है खास
GIFT City का International Financial Services Centre भारत का पहला चालू IFSC है और यह International Financial Services Centres Authority Act, 2019 के तहत काम करता है। यहां स्थापित IBUs भारतीय और विदेशी बैंकों की ऐसी शाखाएं हैं, जो विदेशी मुद्रा में offshore-style बैंकिंग लेनदेन करती हैं। इसी ढांचे ने GIFT IFSC को अंतरराष्ट्रीय पूंजी, विदेशी मुद्रा और बैंकिंग सेवाओं के लिए एक संगठित मंच बनाया है।
RBI की विशेष swap सुविधा के तहत 20 IBUs ने 31 अगस्त 2026 तक FCNR(B) deposits के लिए 54.02 अरब अमेरिकी डॉलर मंजूर किए, जबकि 52.82 अरब अमेरिकी डॉलर का वितरण किया गया। 14 अगस्त 2026 को यह मंजूरी 28.60 अरब डॉलर थी, जो 21 अगस्त 2026 तक बढ़कर 37.26 अरब डॉलर हो गई। यह वृद्धि बताती है कि विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए इस तंत्र का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
ECB और बॉन्ड लिस्टिंग से बढ़ी वित्तीय गतिविधि
External Commercial Borrowings यानी ECB के जरिए पात्र भारतीय संस्थाएं गैर-निवासी ऋणदाताओं से विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाती हैं। अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच GIFT-IFSC स्थित IBUs ने 11.62 अरब अमेरिकी डॉलर के ECB वितरित किए। मासिक स्तर पर यह राशि अप्रैल में 1.54 अरब डॉलर से बढ़कर अगस्त में 3.54 अरब डॉलर तक पहुंच गई।
इसी अवधि में भारतीय बैंकों ने GIFT-IFSC एक्सचेंजों पर बॉन्ड लिस्टिंग के जरिए 11.12 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए। इनमें से 9.17 अरब डॉलर की लिस्टिंग जुलाई और अगस्त 2026 में हुई, जो इस प्लेटफॉर्म पर निवेशकों की बढ़ती रुचि को दिखाती है।
IFSCA की भूमिका और नियामकीय ढांचा
IFSCA, IFSCs में वित्तीय उत्पादों, सेवाओं और संस्थानों के लिए एकीकृत नियामक है। इसका दायरा बैंकिंग, पूंजी बाजार, बीमा, फंड प्रबंधन और विमान लीजिंग जैसी गतिविधियों तक फैला हुआ है। इस एकल नियामकीय व्यवस्था की वजह से GIFT IFSC में अलग-अलग वित्तीय सेवाओं को एक ही ढांचे के भीतर संचालित करना आसान हुआ है।
FCNR(B) deposits गैर-निवासी भारतीयों द्वारा विदेशी मुद्रा में रखी जाने वाली सावधि जमा होती हैं। इन पर RBI के नियम लागू होते हैं, जिनमें परिपक्वता, repatriation और ब्याज दरों से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। Swap facilities बैंकों को विदेशी मुद्रा तरलता प्रबंधन में मदद करती हैं और overseas-linked banking operations के लिए जमा जुटाने का साधन भी बनती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- GIFT का पूरा नाम Gujarat International Finance Tec-City है।
- GIFT IFSC गुजरात के गांधीनगर जिले में स्थित है।
- IFSCA की स्थापना International Financial Services Centres Authority Act, 2019 के तहत हुई थी।
- FCNR(B) जमा विदेशी मुद्रा में रखी जाने वाली NRI term deposits होती हैं।
कुल मिलाकर, GIFT IFSC अब केवल एक वित्तीय क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग क्षमता को मजबूत करने वाला उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है। ECB, swap mobilisations और bond listings के बढ़ते आंकड़े इसकी बढ़ती भूमिका को साफ दिखाते हैं।