अमीनपुर झील में दुर्लभ सफेद-सा कॉर्मोरेंट, पक्षी विविधता पर नई रोशनी

अमीनपुर झील में दुर्लभ सफेद-सा कॉर्मोरेंट, पक्षी विविधता पर नई रोशनी

हैदराबाद के पास अमीनपुर झील में 19 सितंबर 2026 को ग्रेट कॉर्मोरेंट का एक दुर्लभ ल्यूकिस्टिक रूप देखा गया। आमतौर पर गहरे काले पंखों वाला यह जलपक्षी इस बार असामान्य रूप से फीके और हल्के रंग के पंखों के साथ नजर आया। इस दृश्य को हैदराबाद में जन्मे कनाडाई बर्डर रघुवंश चावली ने तस्वीरों में दर्ज किया।

क्या है ल्यूकिज़्म और क्यों खास है यह अवलोकन

पक्षियों में ल्यूकिज़्म एक ऐसी पिगमेंटेशन स्थिति है, जिसमें पंखों, त्वचा या शल्कों में रंग कम हो जाता है। इससे पक्षी आंशिक या पूरी तरह सफेद दिखाई दे सकता है। यह अल्बिनिज़्म से अलग है, क्योंकि अल्बिनिज़्म में मेलेनिन की कमी के साथ आंखों का रंग भी प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से अमीनपुर झील में दिखा यह कॉर्मोरेंट सामान्य पक्षियों से अलग और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रेट कॉर्मोरेंट की पहचान और व्यवहार

ग्रेट कॉर्मोरेंट फालाक्रोकोरासिडी परिवार का बड़ा जलपक्षी है। यह मुख्य रूप से मछलियां खाता है और झीलों, आर्द्रभूमियों, नदियों, मुहानों तथा तटीय जलक्षेत्रों के आसपास देखा जाता है। इसकी पहचान लंबे गले, मुड़ी हुई चोंच, गहरे पंखों और पानी में गहराई तक गोता लगाने की क्षमता से होती है। यही कारण है कि यह पक्षी जल-आधारित पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा माना जाता है।

अमीनपुर झील और शहरी आर्द्रभूमियों का महत्व

अमीनपुर झील तेलंगाना में स्थित एक मीठे पानी की झील है और हैदराबाद के बीएचईएल क्षेत्र के पास आती है। यह क्षेत्र पक्षी-प्रेक्षण के लिए जाना जाता है, क्योंकि यहां की आर्द्रभूमि कई स्थानीय और प्रवासी पक्षियों को आश्रय देती है। शहरी और उप-शहरी जलस्रोत पक्षी विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, इसलिए ऐसे स्थलों पर दुर्लभ प्रजातियों या उनके असामान्य रूपों का दिखना जैव विविधता के लिहाज से अहम संकेत माना जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ग्रेट कॉर्मोरेंट फालाक्रोकोरासिडी परिवार का जलपक्षी है।
  • ल्यूकिज़्म में रंगद्रव्य कम हो जाता है, जबकि अल्बिनिज़्म एक अलग आनुवंशिक स्थिति है।
  • कॉर्मोरेंट मुख्य रूप से मछली खाने वाला और गोता लगाकर शिकार करने वाला पक्षी है।
  • अमीनपुर झील तेलंगाना की एक मीठे पानी की आर्द्रभूमि है, जो पक्षी-प्रेक्षण के लिए जानी जाती है।

ऐसी दुर्लभ पक्षी-देखें न केवल प्राकृतिक विविधता को सामने लाती हैं, बल्कि यह भी बताती हैं कि शहरी जलाशय आज भी कई प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण आवास बने हुए हैं।

Originally written on September 23, 2026 and last modified on September 23, 2026.

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