दिब्रू-सैखोवा में मिली नई परजीवी ततैया, जैव विविधता पर नई रोशनी
असम के दिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान में परजीवी ततैया की एक नई प्रजाति Oxyserphus narendrani की पहचान की गई है। 22 सितंबर 2026 को हुई इस खोज को भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों ने सूक्ष्म शारीरिक लक्षणों के आधार पर प्रमाणित किया। यह खोज पूर्वी भारत की जैव विविधता और कीट-विज्ञान अध्ययन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कैसे हुई नई प्रजाति की पहचान
इस ततैया की पहचान शरीर के कुछ विशिष्ट लक्षणों से की गई, जिनमें वक्ष पर एक क्षैतिज खांचा, अपेक्षाकृत छोटी ओविपोसिटर शीथ और पंख पर एक अलग तरह का धब्बा शामिल है। इसका आकार लगभग 3.3 मिलीमीटर है। इसका सिर काला, शरीर भूरा-काला और पैर पीले रंग के हैं।
नमूना एक येलो पैन ट्रैप से एकत्र किया गया था, जो छोटे कीटों के सर्वेक्षण में इस्तेमाल होने वाला एक सरल और निष्क्रिय ट्रैप है। ऐसे उपकरणों से उन सूक्ष्म कीटों की पहचान संभव होती है, जो सामान्य निगरानी में आसानी से छूट जाते हैं।
दिब्रू-सैखोवा का पारिस्थितिक महत्व
दिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में स्थित है। यह क्षेत्र ब्रह्मपुत्र के बाढ़-मैदान पारितंत्र का हिस्सा है और यहाँ आर्द्र मिश्रित अर्ध-सदाबहार वन, पर्णपाती वन, केनब्रेक और घासभूमियाँ पाई जाती हैं।
ऐसे आवास अनेक प्रकार के कीटों, पक्षियों और अन्य जीवों को सहारा देते हैं। इसी वजह से यह इलाका जैव विविधता अनुसंधान के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। परजीवी ततैयों जैसी प्रजातियाँ किसी क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि का संकेत भी देती हैं।
परजीवी ततैया क्यों हैं महत्वपूर्ण
परजीवी ततैया वे कीट हैं जो अपने अंडे दूसरे कीटों के भीतर या उन पर देते हैं। इनके कई प्रकार अंडा-लार्वा परजीवी होते हैं और इनके मेजबान अक्सर पतंगे और तितलियाँ होती हैं, जो लेपिडोप्टेरा गण में आते हैं।
कृषि विज्ञान में इन ततैयों का विशेष महत्व है, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से कीट-जनसंख्या को नियंत्रित करने में मदद करती हैं। इसी कारण इन्हें जैविक नियंत्रण और एकीकृत कीट प्रबंधन के संदर्भ में उपयोगी माना जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- Oxyserphus narendrani असम में 2026 में खोजी गई एक नई परजीवी ततैया प्रजाति है।
- दिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान असम के डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया जिलों में स्थित है।
- येलो पैन ट्रैप का उपयोग छोटे कीटों के सर्वेक्षण और संग्रह के लिए किया जाता है।
- परजीवी ततैया अक्सर पतंगों और तितलियों जैसे कीटों की प्राकृतिक शत्रु होती हैं।
इस खोज से यह स्पष्ट होता है कि असम के वन और आर्द्रभूमि क्षेत्र अभी भी कई दुर्लभ प्रजातियों को आश्रय दे रहे हैं। हाल के महीनों में राज्य से परजीवी ततैयों की दूसरी खोज भी सामने आई है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध और अब तक पूरी तरह दर्ज न हुई जैव विविधता की ओर संकेत करती है।