भारत के 58 टाइगर रिजर्व की नई कसौटी शुरू
भारत में बाघ संरक्षण की निगरानी और प्रबंधन की गुणवत्ता परखने के लिए 6वें चक्र की प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। नई दिल्ली में 25 सितंबर 2026 को आयोजित इनसेप्शन वर्कशॉप में इस मूल्यांकन अभियान का शुभारंभ किया गया, जिसमें देश के सभी 58 टाइगर रिजर्व शामिल होंगे।
क्या है प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन
प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन यानी Management Effectiveness Evaluation, संरक्षित क्षेत्रों के प्रशासन की एक व्यवस्थित समीक्षा है। इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि किसी टाइगर रिजर्व में संरक्षण के लिए बनाई गई योजनाएँ कितनी प्रभावी हैं, संसाधनों का उपयोग कितना सही हो रहा है और जमीनी स्तर पर परिणाम क्या मिल रहे हैं।
भारत में यह ढांचा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय वन्यजीव संस्थान के सहयोग से लागू किया जाता है। इसका आधार IUCN वर्ल्ड कमीशन ऑन प्रोटेक्टेड एरियाज के वैश्विक ढांचे पर है, जिसे भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढाला गया है।
किन मानकों पर होगा आकलन
इस मूल्यांकन में छह प्रमुख पहलुओं को देखा जाता है—कॉन्टेक्स्ट, प्लानिंग, इनपुट्स, प्रोसेसेस, आउटपुट्स और आउटकम्स। सरल शब्दों में, इसमें यह परखा जाता है कि रिजर्व की स्थिति क्या है, योजना कितनी मजबूत है, मानव और वित्तीय संसाधन कितने उपलब्ध हैं, कामकाज कैसे हो रहा है और संरक्षण के नतीजे क्या सामने आ रहे हैं।
6वें चक्र के दौरान जारी तकनीकी मैनुअल 2026 भी इसी प्रक्रिया को और स्पष्ट दिशा देगा। इस बार एक नया मूल्यांकन मानदंड भी जोड़ा गया है, जो ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़ा है। इसमें वन चौकियों, पर्यटन गतिविधियों और वन्यजीव बचाव केंद्रों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन को भी परखा जाएगा।
पहले के चक्र और इस पहल का महत्व
भारत में इससे पहले प्रबंधन प्रभावशीलता मूल्यांकन के पांच चक्र पूरे किए जा चुके हैं। ये क्रमशः 2006, 2010, 2014, 2018 और 2022 में हुए थे। इन चक्रों में 28, 39, 43, 50 और 51 टाइगर रिजर्व का आकलन किया गया था। अब 58 रिजर्व को शामिल करना इस बात का संकेत है कि बाघ संरक्षण व्यवस्था का दायरा और निगरानी दोनों और व्यापक हो गए हैं।
टाइगर रिजर्व भारत में वन्यजीव संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में गिने जाते हैं। इनमें कोर और बफर क्षेत्र होते हैं, जहां आवास संरक्षण, अवैध शिकार पर रोक और नियंत्रित पर्यटन जैसे पहलुओं का संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसे में यह मूल्यांकन न केवल प्रशासनिक समीक्षा है, बल्कि संरक्षण नीति को मजबूत करने का भी एक अहम उपकरण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत भारत में 1973 में केंद्रीय प्रायोजित योजना के रूप में हुई थी।
- राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत किया गया।
- भारत में वर्तमान 6वें चक्र में कुल 58 टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
- IUCN वर्ल्ड कमीशन ऑन प्रोटेक्टेड एरियाज संरक्षित क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए वैश्विक दिशा-निर्देश तैयार करता है।
इस नए मूल्यांकन चक्र से यह समझने में मदद मिलेगी कि देश के टाइगर रिजर्व संरक्षण, प्रबंधन और निगरानी के स्तर पर कितने सक्षम हैं और किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।