मैन्युफैक्चरिंग डिफ्लेटर पर MoSPI की सफाई, GDP गणना की पद्धति पर बढ़ी स्पष्टता

मैन्युफैक्चरिंग डिफ्लेटर पर MoSPI की सफाई, GDP गणना की पद्धति पर बढ़ी स्पष्टता

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के GDP आंकड़ों के बाद मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आए नकारात्मक 1.5% इम्प्लिसिट GVA डिफ्लेटर को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने बताया कि यह स्थिति राष्ट्रीय खातों में इस्तेमाल होने वाली डबल-डिफ्लेशन पद्धति का परिणाम है, न कि उत्पादन में किसी तरह की गणितीय त्रुटि का संकेत।

GDP और GVA को समझना क्यों जरूरी है

GDP यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी देश में एक तय अवधि के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल बाजार मूल्य को दर्शाता है। इसके मुकाबले GVA यानी सकल मूल्य वर्धन किसी सेक्टर द्वारा जोड़े गए मूल्य को मापता है। भारत की राष्ट्रीय लेखा प्रणाली में सेक्टरवार उत्पादन का आकलन करने के लिए GVA एक अहम आधार है।

MoSPI ने 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाकर संशोधित GDP श्रृंखला तैयार की है। आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है, जिसके आधार पर स्थिर कीमतों पर वृद्धि और महंगाई-समायोजित तुलना की जाती है। इसी बदलाव के साथ कई पुराने अनुमानों और गणना पद्धतियों को भी अद्यतन किया गया है।

मैन्युफैक्चरिंग में नकारात्मक डिफ्लेटर कैसे बना

मंत्रालय के अनुसार, Q1 FY27 में मैन्युफैक्चरिंग का नाममात्र GVA 7.7% बढ़ा, जबकि वास्तविक GVA 9.2% बढ़ा। इसी अंतर के कारण इम्प्लिसिट डिफ्लेटर नकारात्मक 1.5% आया। इसका मतलब यह है कि इनपुट कीमतें, खासकर बेसिक मेटल्स, टेक्सटाइल्स और रबर जैसे क्षेत्रों में, आउटपुट कीमतों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ीं।

डबल-डिफ्लेशन पद्धति में आउटपुट और इंटरमीडिएट कंजम्प्शन को अलग-अलग कीमतों से समायोजित किया जाता है, ताकि वास्तविक GVA निकाला जा सके। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) भी राष्ट्रीय खातों में इस पद्धति की सिफारिश करता है।

GDP डिफ्लेटर CPI और WPI से अलग क्यों है

GDP डिफ्लेटर पूरे अर्थव्यवस्था में कीमतों में आए बदलाव का व्यापक माप है। यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से अलग होता है, क्योंकि इन दोनों का दायरा सीमित होता है। CPI घरों द्वारा चुकाई जाने वाली खुदरा कीमतों को मापता है, जबकि WPI थोक स्तर की कीमतों को।

MoSPI के अनुसार, Q1 में इम्प्लिसिट GDP मुद्रास्फीति दर 2.5% रही और इसमें 300 से अधिक अलग-अलग डिफ्लेटर शामिल थे। इसलिए GDP डिफ्लेटर को CPI या WPI के साथ सीधे तुलना करना सही नहीं माना जाता।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • MoSPI भारत में आधिकारिक सांख्यिकी के लिए नोडल मंत्रालय है।
  • IMF राष्ट्रीय खातों में वास्तविक GVA मापने के लिए डबल-डिफ्लेशन पद्धति की सिफारिश करता है।
  • भारत की संशोधित GDP श्रृंखला में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है।
  • GDP डिफ्लेटर, CPI और WPI की तुलना में अधिक व्यापक मूल्य सूचक है।

कुल मिलाकर, MoSPI की यह सफाई बताती है कि GDP और GVA के आंकड़ों को समझने के लिए केवल वृद्धि दर नहीं, बल्कि उनकी गणना पद्धति और आधार वर्ष को भी देखना जरूरी है। संशोधित राष्ट्रीय खातों में ऐसे तकनीकी बदलाव अर्थव्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को अधिक सटीक बनाने के लिए किए जाते हैं।

Originally written on September 3, 2026 and last modified on September 3, 2026.

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