बीमा सेवाओं में पारदर्शिता के लिए आईआरडीएआई की नई डिजिटल पहल

बीमा सेवाओं में पारदर्शिता के लिए आईआरडीएआई की नई डिजिटल पहल

बीमा क्षेत्र में डेटा, दावों और पॉलिसियों की जानकारी को एकीकृत करने के लिए भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री (Public Insurance Registry) के प्रस्ताव पर परामर्श पत्र जारी किया है। यह पहल बीमा सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सुलभ और डिजिटल रूप से जुड़ा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री क्या होगी

आईआरडीएआई के अनुसार प्रस्तावित सार्वजनिक बीमा रजिस्ट्री एक इंटरऑपरेबल डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर होगी। इसका अर्थ यह है कि यह किसी एक केंद्रीय डेटाबेस की तरह काम नहीं करेगी, बल्कि अलग-अलग संस्थानों के बीच जानकारी साझा करने के लिए एक साझा डिजिटल परत उपलब्ध कराएगी।

इस मॉडल में ग्राहक का मूल डेटा उसी संस्था के पास रहेगा, जहां वह पहले से सुरक्षित है। रजिस्ट्री का उद्देश्य बीमा क्षेत्र में डेटा तक आसान पहुंच, सेवा वितरण में सुधार और विभिन्न हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय बनाना है।

पॉलिसीधारकों और कंपनियों को क्या लाभ

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पॉलिसीधारक एक ही डैशबोर्ड पर अपनी सक्रिय पॉलिसियों की जानकारी देख सकेंगे, बीमा उत्पादों की तुलना कर सकेंगे, दावों और शिकायतों की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे तथा बिना दावे के पड़े बीमा धन की पहचान कर सकेंगे।

बीमा कंपनियों और पुनर्बीमाकर्ताओं के लिए यह प्रणाली सत्यापित और व्यापक डेटा उपलब्ध कराएगी, जिससे अंडरराइटिंग, प्रीमियम निर्धारण, जोखिम आकलन और धोखाधड़ी की पहचान में मदद मिल सकती है। इससे बीमा बाजार में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ने की उम्मीद है।

नीति ढांचे और सुझाव प्रक्रिया से जुड़ी अहम बातें

यह प्रस्ताव सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 के अनुरूप तैयार किया गया है। आईआरडीएआई ने इस पर हितधारकों और आम जनता से सुझाव मांगे हैं, जिनकी अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 तय की गई है।

रजिस्ट्री में पॉलिसीधारकों, बीमाकर्ताओं, पुनर्बीमाकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों और सरकारी विभागों सहित आठ हितधारक समूहों को जोड़ने की योजना है। यह ढांचा बीमा सेवाओं को अधिक समावेशी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव माना जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • आईआरडीएआई का पूरा नाम Insurance Regulatory and Development Authority of India है।
  • पुनर्बीमाकर्ता वे संस्थाएं होती हैं जो बीमा कंपनियों को बीमा सुरक्षा देती हैं।
  • इंटरऑपरेबिलिटी का अर्थ है अलग-अलग प्रणालियों का एक साझा मानक के जरिए आपस में डेटा साझा कर पाना।
  • बिना दावे की बीमा राशि वह धन है जो पात्र पॉलिसीधारकों या लाभार्थियों को अभी तक नहीं मिला होता।

यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो बीमा क्षेत्र में डिजिटल समन्वय, ग्राहक सुविधा और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को नई दिशा मिल सकती है।

Originally written on September 3, 2026 and last modified on September 3, 2026.

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