DRDO के AEW&C Mk-II से वायु निगरानी क्षमता को नई मजबूती
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 22 जुलाई 2026 को एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल यानी AEW&C Mk-II कार्यक्रम के लिए दो अहम अनुबंध किए। यह परियोजना भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी, कमान और नियंत्रण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। जुलाई 2025 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने इस कार्यक्रम को 19,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ मंजूरी दी थी।
AEW&C Mk-II क्या है और क्यों अहम है
AEW&C एक ऐसा एयरबोर्न सर्विलांस और कमांड सिस्टम है, जिसे विमान पर लगाया जाता है। इसमें रडार, संचार उपकरण और मिशन कंप्यूटर जैसी प्रणालियां होती हैं, जिनकी मदद से हवाई क्षेत्र में लक्ष्य की पहचान, ट्रैकिंग और समन्वय किया जाता है। आधुनिक रक्षा ढांचे में ऐसे सिस्टम बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि ये न केवल निगरानी बढ़ाते हैं बल्कि समय रहते निर्णय लेने में भी मदद करते हैं।AEW&C Mk-II कार्यक्रम का लक्ष्य भारतीय वायुसेना के लिए अधिक सक्षम, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले और उन्नत मिशन सिस्टम से लैस प्लेटफॉर्म तैयार करना है। इससे देश की एयर डिफेंस नेटवर्क और भी सशक्त होने की उम्मीद है।
कौन-कौन से अनुबंध हुए और किसकी क्या भूमिका है
पहला अनुबंध नई दिल्ली स्थित एआई इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (AIESL) को दिया गया है। इसके तहत छह एयरबस A321 विमानों को वाणिज्यिक यात्री कॉन्फ़िगरेशन से बदलकर ‘ग्रीन प्लेटफॉर्म’ में परिवर्तित किया जाएगा। ये विमान पहले एयर इंडिया के पास थे और फिलहाल एयर हेडक्वार्टर्स कम्युनिकेशन स्क्वाड्रन द्वारा संचालित हैं।दूसरा अनुबंध अहमदाबाद स्थित अडानी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADSTL) के साथ किया गया है। इसे AEW&C Mk-II के मिशन सिस्टम्स के लिए डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर बनाया गया है। इस परियोजना में DRDO की प्रयोगशाला सेंटर फॉर एयर बर्न सिस्टम्स (CABS) प्रमुख भूमिका निभा रही है और वही संशोधित A321 प्लेटफॉर्म पर स्वदेशी मिशन सिस्टम्स का एकीकरण करेगी।
आगे की प्रक्रिया और रणनीतिक महत्व
मिशन सिस्टम्स के एकीकरण के बाद इन विमानों का भारतीय वायुसेना के साथ उड़ान परीक्षण किया जाएगा। योजना के अनुसार AEW&C Mk-II बेड़े का परिचालन 2032-2033 के बीच शुरू हो सकता है। यह परियोजना भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता, निजी क्षेत्र की भागीदारी और बड़े एयरबोर्न मिशन प्लेटफॉर्म के विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- AEW&C का पूरा नाम Airborne Early Warning & Control है।
- CABS का अर्थ Centre for Air Borne Systems है, जो DRDO के तहत काम करता है।
- AEW&C Mk-II कार्यक्रम को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी ने जुलाई 2025 में मंजूरी दी थी।
- Airbus A321 एक ट्विन-इंजन, नैरो-बॉडी कमर्शियल विमान है, जिसे इस परियोजना में बेस प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
AEW&C Mk-II कार्यक्रम भारत की हवाई निगरानी क्षमता को नई तकनीकी ऊंचाई देने वाला कदम है। इसमें DRDO, वायुसेना और निजी उद्योग की संयुक्त भूमिका आने वाले वर्षों में रक्षा आत्मनिर्भरता को और मजबूत कर सकती है।