DRDO की दो तकनीकें अब भारतीय उद्योग के हाथ
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की नौसैनिक प्रयोगशाला ने स्वदेशी रक्षा निर्माण को आगे बढ़ाते हुए दो महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए लाइसेंसिंग समझौते किए हैं। विशाखापत्तनम स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लैबोरेटरी (NSTL) ने 21 अगस्त 2026 को सबमरीन फायरड डिकॉय और LM2500 गैस टर्बाइन की फैब्रिकेशन, इंस्टॉलेशन तथा कमीशनिंग से जुड़ी तकनीकें भारतीय उद्योग भागीदारों को हस्तांतरित कीं।
नौसैनिक सुरक्षा से जुड़ी अहम तकनीक
पहला समझौता भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ किया गया, जिसे सबमरीन फायरड डिकॉय की तकनीक सौंपी गई। यह एक ऐसा नौसैनिक काउंटरमेजर है, जिसका उपयोग पनडुब्बियां आने वाले खतरे को भ्रमित करने और अपनी जीवित रहने की क्षमता बढ़ाने के लिए करती हैं। समुद्री युद्धक्षेत्र में ऐसी प्रणालियां पनडुब्बियों की सुरक्षा और मिशन-क्षमता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
दूसरे समझौते के तहत Vertex Engineering Systems Pvt. Ltd. को LM2500 गैस टर्बाइन की फैब्रिकेशन, इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग की तकनीक दी गई। यह टर्बाइन नौसैनिक प्रणोदन और समुद्री उपयोगों में काम आती है। इस हस्तांतरण से देश में रक्षा इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
तकनीक हस्तांतरण का महत्व
Licensing Agreement for Transfer of Technology यानी LAToT एक औपचारिक व्यवस्था होती है, जिसके तहत कोई शोध संस्था विकसित तकनीक को उत्पादन या स्थापना के लिए औद्योगिक साझेदार को देती है। DRDO इसी मॉडल के जरिए प्रयोगशाला स्तर पर विकसित रक्षा तकनीकों को भारतीय कंपनियों तक पहुंचाता है, ताकि उनका वास्तविक निर्माण देश में ही हो सके।
यह प्रक्रिया रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता घटाने, घरेलू विनिर्माण बढ़ाने और निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करने में मदद करती है। यही कारण है कि ऐसे समझौते आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण की रफ्तार
NSTL का यह कदम DRDO की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत रक्षा अनुसंधान को उद्योग से जोड़ा जा रहा है। हाल के महीनों में भी DRDO और उसकी प्रयोगशालाओं ने कई तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीक का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
विशाखापत्तनम स्थित NSTL नौसैनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में DRDO की प्रमुख प्रयोगशालाओं में से एक है। वहीं भारत डायनेमिक्स लिमिटेड रक्षा उत्पादन से जुड़ा एक प्रमुख सार्वजनिक उपक्रम है, जबकि Vertex Engineering Systems जैसी निजी कंपनियां तकनीक के औद्योगिक उपयोग में अहम भूमिका निभाती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- NSTL, DRDO की एक प्रयोगशाला है और यह विशाखापत्तनम में स्थित है।
- LAToT का पूरा नाम Licensing Agreement for Transfer of Technology है।
- सबमरीन फायरड डिकॉय पनडुब्बियों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल होने वाला नौसैनिक काउंटरमेजर है।
- LM2500 गैस टर्बाइन का उपयोग नौसैनिक प्रणोदन और समुद्री अनुप्रयोगों में किया जाता है।
इन समझौतों से स्पष्ट है कि DRDO अब केवल तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे भारतीय उद्योग तक पहुंचाकर रक्षा निर्माण को अधिक स्वदेशी और सक्षम बना रहा है।