CCRAS ने आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए शुरू कीं तीन नई पहल
भारत में साक्ष्य-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS) ने 3 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित अपनी पांचवीं कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान तीन महत्वपूर्ण अनुसंधान पहलों की शुरुआत की। बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने की। इन पहलों का उद्देश्य आयुर्वेद अनुसंधान को अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और डिजिटल रूप से सुलभ बनाना है।
अनुसंधान पद्धति की नई पाठ्यपुस्तक जारी
CCRAS ने ‘आयुर्वेद प्रबोधिनी ग्रंथमाला’ श्रृंखला के अंतर्गत रिसर्च मेथडोलॉजी (अनुसंधान पद्धति) की नई पाठ्यपुस्तक जारी की। इस पुस्तक को 50 अनुसंधान वैज्ञानिकों और शिक्षकों ने मिलकर तैयार किया है। इसे भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (NCISM) द्वारा निर्धारित परिणाम-आधारित गतिशील पाठ्यक्रम के अनुरूप विकसित किया गया है। यह विशेष रूप से आयुर्वेद के स्नातकोत्तर (एमडी/एमएस) और पीएचडी विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, शोध कौशल तथा साक्ष्य-आधारित अनुसंधान को मजबूत करने में सहायक होगी।
CCRAS PRAYATNA 2026–27 का शुभारंभ
परिषद ने CCRAS PRAYATNA 2026–27 कार्यक्रम के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) भी जारी किया। यह परिषद का प्रमुख कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद के स्नातकोत्तर और शोधार्थियों में वैज्ञानिक लेखन को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, ताकि युवा शोधकर्ता गुणवत्तापूर्ण शोध पत्र, शोध प्रबंध और अन्य वैज्ञानिक दस्तावेज तैयार करने में दक्ष बन सकें।
डिजिटल इकोसिस्टम डैशबोर्ड से बढ़ेगी शोध संसाधनों की पहुंच
तीसरी पहल के रूप में CCRAS डिजिटल इकोसिस्टम डैशबोर्ड लॉन्च किया गया। यह एकीकृत डिजिटल मंच परिषद के अनुसंधान संसाधनों, संस्थागत आंकड़ों और शोध परिणामों को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराएगा। इससे शोध सामग्री तक आसान पहुंच, पारदर्शिता और डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही आयुर्वेद अनुसंधान का व्यापक प्रसार भी सुनिश्चित होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CCRAS (केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद) आयुष मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संगठन है और आयुर्वेद अनुसंधान का शीर्ष निकाय माना जाता है।
- आयुष मंत्रालय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा प्रणालियों का संचालन और विकास करता है।
- राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग (NCISM) भारतीय चिकित्सा प्रणालियों में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा का नियामक संस्थान है।
- आयुर्वेद में वैज्ञानिक लेखन के अंतर्गत शोध पत्र, शोध प्रबंध, मोनोग्राफ और साक्ष्य-आधारित दस्तावेजीकरण को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता है।
इन तीनों पहलों के माध्यम से CCRAS ने स्पष्ट किया है कि वह आयुर्वेद अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर अधिक विश्वसनीय, वैज्ञानिक और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। शिक्षा, अनुसंधान और डिजिटल नवाचार का यह समन्वय भविष्य में आयुर्वेद के विकास और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को नई गति प्रदान कर सकता है।