BS-VI वाहनों के लिए पीयूसी वैधता में बदलाव का प्रस्ताव
केंद्र सरकार ने BS-VI मानक वाले निजी वाहनों के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUCC की वैधता अवधि को लेकर नया प्रस्ताव रखा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 27 जुलाई 2026 को जारी मसौदा अधिसूचना में निजी और वाणिज्यिक वाहनों के लिए अलग-अलग समय-सीमा तय करने का सुझाव दिया है। यह प्रस्ताव PUCC 3.0 योजना के तहत आया है और इसका मकसद उत्सर्जन मानकों के अनुपालन को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
निजी वाहनों के लिए क्या बदलाव प्रस्तावित हैं
मसौदे के अनुसार, BS-VI निजी वाहन जो छह साल तक पुराने हैं, उनके लिए PUCC की वैधता तीन साल तक रखने का प्रस्ताव है। छह से दस साल पुराने BS-VI निजी वाहनों को हर साल प्रमाणपत्र नवीनीकृत कराना होगा, जबकि 10 साल से अधिक पुराने वाहनों के लिए यह अवधि छह महीने होगी।यह व्यवस्था मौजूदा एकसमान नवीनीकरण प्रणाली की तुलना में अधिक उम्र-आधारित और श्रेणी-आधारित मानी जा रही है। इससे नए और अपेक्षाकृत कम उपयोग वाले वाहनों के लिए प्रक्रिया सरल हो सकती है, जबकि पुराने वाहनों पर निगरानी अधिक सख्त रहेगी।
व्यावसायिक और पुराने मानक वाले वाहनों पर असर
BS-VI परिवहन या कमर्शियल वाहनों के लिए प्रस्तावित PUCC वैधता छह साल तक के वाहनों पर पहली पंजीकरण तिथि से दो साल की है। वहीं BS-IV वाहन पहले की तरह हर छह महीने में नवीनीकरण कराते रहेंगे। BS-I, BS-II और BS-III श्रेणी के वाहनों के लिए नवीनीकरण की अवधि तीन महीने रखने का प्रस्ताव है।इससे स्पष्ट है कि सरकार पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों पर अधिक कड़ी निगरानी बनाए रखना चाहती है, जबकि नए BS-VI वाहनों के लिए अपेक्षाकृत लंबी वैधता देने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
मसौदा अधिसूचना और आगे की प्रक्रिया
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि मसौदा अधिसूचना पर जनता से आपत्तियां और सुझाव 30 दिनों के भीतर भेजे जा सकते हैं। इस परामर्श अवधि के बाद अंतिम नियमों पर विचार किया जाएगा। यानी अभी यह प्रस्ताव अंतिम नहीं है, बल्कि नियम बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PUCC का पूरा नाम Pollution Under Control Certificate है।
- यह प्रमाणपत्र वाहन के उत्सर्जन परीक्षण के बाद जारी किया जाता है।
- BS-VI का अर्थ Bharat Stage VI है, जो भारत का छठा उत्सर्जन मानक है।
- BS-VI मानक 1 अप्रैल 2020 से नए वाहनों के लिए पूरे देश में लागू हुआ था।
यह प्रस्ताव भारत में वाहन उत्सर्जन नियंत्रण और पर्यावरणीय अनुपालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। अंतिम नियमों के बाद ही यह साफ होगा कि नई वैधता अवधि किस रूप में लागू की जाएगी।