BIOFACH INDIA 2026 से जैविक निर्यात को नई रफ्तार

BIOFACH INDIA 2026 से जैविक निर्यात को नई रफ्तार

एपीडा ने 6 अगस्त 2026 को नूर्नबर्गमेस्से इंडिया के साथ मिलकर BIOFACH INDIA 2026 का आयोजन किया। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 6 से 8 अगस्त तक चलने वाला यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला भारत के जैविक, प्राकृतिक और टिकाऊ खाद्य उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने का मंच बना।

जैविक उत्पादों के लिए बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच

BIOFACH INDIA को जैविक खाद्य क्षेत्र का प्रमुख व्यापार मेला माना जाता है, जहां उत्पादकों, निर्यातकों, खरीदारों और नीति-निर्माताओं के बीच सीधा संवाद होता है। 2026 संस्करण में 200 से अधिक कंपनियों की भागीदारी रही, जबकि एपीडा पवेलियन में 60 से अधिक प्रदर्शक शामिल किए गए। इनमें महिला उद्यमी, स्टार्टअप और किसान उत्पादक संगठन भी मौजूद रहे, जिससे छोटे और उभरते उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की संभावना बढ़ी।

एपीडा पवेलियन में राज्यों की जैविक पहचान

एपीडा ने हॉल नंबर 1 में 2,000 वर्ग मीटर का विशेष पवेलियन आरक्षित किया, जहां प्रमाणित जैविक उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इसमें मिलेट्स, मसाले, शहद, चाय और न्यूट्रास्युटिकल्स जैसे उत्पाद शामिल थे। ये उत्पाद सिक्किम, असम, मिजोरम, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और उत्तराखंड जैसे राज्यों से आए, जो भारत की विविध जैविक उत्पादन क्षमता को दर्शाते हैं।

खरीदारों से सीधा संपर्क और निर्यात के अवसर

7 अगस्त 2026 को एपीडा ने संरचित Buyer-Seller Meets आयोजित किए, ताकि भारतीय निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से सीधे जोड़ा जा सके। इन बैठकों में 13 वैश्विक बाजारों से 35 से अधिक खरीदार शामिल हुए, जिनमें ताइवान, दक्षिण कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया और मिस्र जैसे देश प्रमुख रहे। ऐसे मंच भारतीय जैविक उत्पादों के लिए नए निर्यात समझौते, बाजार विस्तार और दीर्घकालिक व्यापार संबंधों का रास्ता खोलते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एपीडा की स्थापना Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority Act, 1985 के तहत की गई थी।
  • एपीडा, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • FPO यानी किसान उत्पादक संगठन किसानों का सामूहिक ढांचा होता है, जिससे बाजार तक पहुंच और सौदेबाजी की क्षमता बढ़ती है।
  • जैविक प्रमाणित उत्पादों के उत्पादन में सामान्यतः रासायनिक उर्वरकों, सिंथेटिक कीटनाशकों और जीएमओ पर कड़े मानक लागू होते हैं।

इस आयोजन ने एक बार फिर दिखाया कि भारत का जैविक क्षेत्र केवल घरेलू मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक निर्यात अवसरों से भी जुड़ रहा है। राज्य-स्तरीय उत्पादकों, उद्यमियों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी से यह मंच भारत की जैविक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

Originally written on August 7, 2026 and last modified on August 7, 2026.

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