21वीं बिहार बटालियन का 46वां स्थापना दिवस, सैन्य परंपरा और सेवा-इतिहास का सम्मान
दानापुर छावनी स्थित बिहार रेजिमेंट सेंटर में 20 जुलाई 2026 को 21वीं बिहार बटालियन का 46वां स्थापना दिवस मनाया गया। यह अवसर केवल एक औपचारिक समारोह नहीं था, बल्कि उस सैन्य इकाई की सेवा, अनुशासन और परंपरा को याद करने का दिन भी रहा, जिसने पिछले चार दशकों में कई महत्वपूर्ण अभियानों में अपनी भूमिका निभाई है।भारतीय सेना में किसी भी बटालियन का राइजिंग डे उसकी स्थापना की वर्षगांठ होती है। इसी परंपरा के तहत 21वीं बिहार बटालियन की स्थापना 20 जुलाई 1981 को लेफ्टिनेंट कर्नल मोहम्मद मंसूर मलिक ने की थी। बिहार रेजिमेंट सेंटर, दानापुर, रेजिमेंट से जुड़ा प्रमुख संस्थान है, जहां प्रशिक्षण, प्रशासन और औपचारिक सैन्य गतिविधियां संचालित होती हैं।
सेवा-इतिहास में कई अहम तैनातियां
21वीं बिहार बटालियन का परिचालन इतिहास काफी समृद्ध रहा है। इसे 1982 से 1985 के बीच हिमाचल प्रदेश के पालमपुर में तैनाती मिली थी। इसके बाद यह 1990-91 में ऑपरेशन बजरंग का हिस्सा बनी। वर्ष 1999 से 2003 तक बटालियन ने ऑपरेशन रक्षक में भी सेवा दी। बाद में 2014 में ऑपरेशन अलर्ट के दौरान भी इसकी भूमिका रही। ये तैनातियां आंतरिक सुरक्षा, क्षेत्रीय जिम्मेदारियों और फील्ड ड्यूटी के संदर्भ में बटालियन की सक्रियता को दर्शाती हैं।
समारोह में सैन्य परंपराओं का पालन
समारोह के दौरान बिहार रेजिमेंट सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर राकेश कुमार बोरा ने वीर स्मृति स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया और सैन्य बैंड ने देशभक्ति धुनें प्रस्तुत कीं। कार्यक्रम में सेवारत अधिकारी और पूर्व सैनिक भी शामिल हुए, जिनमें लेफ्टिनेंट कर्नल अंकुर मिश्रा और सूबेदार मेजर नारायण प्रधान का नाम प्रमुख रहा।ऐसे आयोजन भारतीय सेना की रेजिमेंटल संस्कृति का अहम हिस्सा होते हैं। इनमें न केवल पुरानी उपलब्धियों को याद किया जाता है, बल्कि नई पीढ़ी के सैनिकों को भी इकाई की विरासत, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा से जोड़ा जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 21वीं बिहार बटालियन की स्थापना 20 जुलाई 1981 को हुई थी।
- बिहार रेजिमेंट सेंटर बिहार के दानापुर छावनी में स्थित है।
- ऑपरेशन बजरंग भारतीय सेना का 1990-91 का अभियान था।
- ऑपरेशन रक्षक 1999 से 2003 तक चला था।
21वीं बिहार बटालियन का 46वां स्थापना दिवस भारतीय सेना की उस परंपरा को रेखांकित करता है, जिसमें हर इकाई अपने इतिहास, बलिदान और सेवा-भाव को सम्मान के साथ याद करती है। यह अवसर सैन्य गौरव के साथ-साथ रेजिमेंटल एकता और निरंतर सेवा की भावना को भी मजबूत करता है।