2040 तक कोको उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का भारत का लक्ष्य
भारत ने 2040 तक कोको उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत एक व्यापक रोडमैप तैयार किया गया है। वर्तमान में देश कोको के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है, जहां सालाना आयात 866 मिलियन डॉलर से अधिक है। बढ़ती मांग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह रणनीति ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन के अनुरूप घरेलू उत्पादन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राष्ट्रीय मिशन और प्रारंभिक सुधार
इस रोडमैप के तहत 2026 से 2028 के बीच ‘नेशनल मिशन ऑन कोको’ शुरू करने का प्रस्ताव है। इस चरण में एक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) की स्थापना और प्रमुख कोको उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 250 हेक्टेयर में पॉलीक्लोनल सीड गार्डन विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उत्पादन क्षमता को मजबूत आधार देना है।
किसानों का सशक्तिकरण और क्षमता निर्माण
2028 से 2030 के बीच का चरण किसानों के प्रशिक्षण और सशक्तिकरण पर केंद्रित होगा। इस दौरान लगभग एक लाख किसानों को प्रशिक्षित करने की योजना है। साथ ही, क्षेत्रीय स्तर पर CoE हब स्थापित किए जाएंगे। करीब 2.5 करोड़ पौधों का वितरण किया जाएगा और डिजिटल किसान रजिस्ट्री व ट्रेसबिलिटी सिस्टम लागू किए जाएंगे, जिससे उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।
उत्पादन और प्रसंस्करण का विस्तार
2030 से 2035 के बीच कोको की खेती को एक लाख हेक्टेयर तक विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान उत्पादन क्षमता और उपज में उल्लेखनीय वृद्धि पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही, अनुसंधान और विकास गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा और कोको प्रसंस्करण उद्योग के विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा। इस चरण का लक्ष्य देश की कम से कम 50 प्रतिशत मांग को घरेलू उत्पादन से पूरा करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कोको चॉकलेट और अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाला प्रमुख कच्चा माल है।
- वर्तमान में भारत अपनी कोको की कुल मांग का 20 प्रतिशत से भी कम घरेलू स्तर पर पूरा करता है।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में आयात निर्भरता को कम करना है।
- ट्रेसबिलिटी सिस्टम कृषि उत्पादों की निगरानी को खेत से बाजार तक सुनिश्चित करता है।
अंतिम चरण (2035–2040) में भारत का लक्ष्य पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करना और एक वैश्विक कोको प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभरना है। इस रणनीति से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि भारत निर्यातक देश के रूप में भी स्थापित हो सकता है। बढ़ती घरेलू मांग और वैश्विक अवसरों के बीच यह रोडमैप भारत के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।