हेट स्पीच रोकने के लिए नए नहीं, मौजूदा कानूनों का सख्त पालन जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

हेट स्पीच रोकने के लिए नए नहीं, मौजूदा कानूनों का सख्त पालन जरूरी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा है कि भारत में हेट स्पीच (घृणा भाषण) और हेट क्राइम (घृणा अपराध) को रोकने के लिए नए कानून बनाने से अधिक जरूरी मौजूदा कानूनों का प्रभावी और सख्त पालन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाएं कानूनों की कमी के कारण नहीं, बल्कि कमजोर क्रियान्वयन, पुलिस की देरी और जवाबदेही की कमी के कारण बढ़ती हैं।

यह टिप्पणी उस समय की गई जब न्यायालय हेट स्पीच, अफवाह फैलाने और सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी चिंताओं की सुनवाई कर रहा था।

मौजूदा कानून पर्याप्त हैं

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि भारत में भारतीय दंड संहिता (IPC) और अन्य कानूनों के तहत हेट स्पीच और संबंधित अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान पहले से मौजूद हैं।

अदालत ने कहा कि समस्या नए कानूनों की अनुपस्थिति नहीं, बल्कि मामलों की रिपोर्ट दर्ज करने में देरी, पुलिस की निष्क्रियता और कार्रवाई की कमी है। यदि मौजूदा कानूनों को सही तरीके से लागू किया जाए, तो सामाजिक अशांति और हिंसा को काफी हद तक रोका जा सकता है।

एफआईआर तुरंत दर्ज करने पर जोर

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के निर्देशों को दोहराते हुए कहा कि हेट स्पीच से संबंधित शिकायत मिलते ही पुलिस अधिकारियों को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।

एफआईआर दर्ज करने में देरी या इनकार से न केवल जनता का विश्वास कमजोर होता है, बल्कि सामाजिक तनाव और अधिक बढ़ सकता है। अदालत ने कहा कि समय पर कानूनी कार्रवाई ही अफवाहों और भड़काऊ भाषणों को हिंसा में बदलने से रोक सकती है।

मजिस्ट्रेट को पूर्व सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हेट स्पीच से जुड़े मामलों में मजिस्ट्रेट को संज्ञान लेने के लिए पहले से सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।

यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि कई संवेदनशील मामलों में सरकारी स्वीकृति की प्रक्रिया को देरी का कारण बनाया जाता था। इस बाधा को हटाकर अदालत ने तेज न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक मूल्यों की बेहतर सुरक्षा का रास्ता मजबूत किया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
  • अनुच्छेद 19(2) के तहत सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता के आधार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
  • IPC की धारा 153A विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित है।
  • IPC की धारा 295A धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने पर दंड का प्रावधान करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हेट स्पीच संविधान के बंधुत्व और धर्मनिरपेक्षता जैसे मूल्यों को कमजोर करती है। इसलिए जरूरी है कि कानून केवल कागज पर न रहें, बल्कि बिना पक्षपात और बिना देरी के लागू किए जाएं। यही संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द की वास्तविक रक्षा कर सकता है।

Originally written on April 29, 2026 and last modified on April 29, 2026.

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