गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की नई पहल
भारत में तेजी से बढ़ रही गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था को देखते हुए केंद्र सरकार इन श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित कर रही है। प्रस्तावित ढांचे में दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य सुरक्षा, मातृत्व सहायता और वृद्धावस्था संरक्षण जैसे लाभ शामिल हैं। यह व्यवस्था सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, ई-श्रम पोर्टल और गिग एवं प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड के माध्यम से लागू की जाएगी।
गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक कौन हैं?
गिग श्रमिक वे लोग होते हैं जो अल्पकालिक, कार्य-आधारित या अनुबंध आधारित सेवाएं प्रदान करते हैं। वहीं प्लेटफॉर्म श्रमिक डिजिटल प्लेटफॉर्म या मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सेवाएं देते हैं। उदाहरण के तौर पर कैब सेवा, खाद्य वितरण, घरेलू सेवाएं और अन्य ऑनलाइन आधारित कार्य इस श्रेणी में आते हैं। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 ने पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता दी, जिससे उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजनाओं का मार्ग प्रशस्त हुआ।
प्रस्तावित सामाजिक सुरक्षा लाभ
सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे सामाजिक सुरक्षा पैकेज में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं। इनमें दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य बीमा, मातृत्व सहायता और वृद्धावस्था संरक्षण प्रमुख हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, किसी गिग श्रमिक को लाभ प्राप्त करने के लिए एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 90 दिनों तक कार्य करना होगा। यदि कोई श्रमिक एक से अधिक एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म से जुड़ा है, तो उसके लिए न्यूनतम 120 दिनों के कार्य की शर्त निर्धारित की गई है।
आयुष्मान भारत योजना से जुड़ाव
केंद्रीय बजट 2025-26 में गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के दायरे में शामिल करने की घोषणा की गई थी। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। यह कदम असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वित्तपोषण और ई-श्रम पोर्टल की भूमिका
सरकार ने प्लेटफॉर्म कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने श्रमिकों का डेटा ई-श्रम पोर्टल से जोड़ें। ई-श्रम भारत के असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस है, जिसके माध्यम से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे श्रमिकों तक पहुंचाया जा सकता है। इसके साथ ही सरकार सामाजिक सुरक्षा कोष को भी सक्रिय कर रही है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत एग्रीगेटर कंपनियों से उनके वार्षिक कारोबार का 1 से 2 प्रतिशत तक योगदान लिया जा सकता है। हालांकि यह राशि श्रमिकों को देय भुगतान के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी।
गिग अर्थव्यवस्था का बढ़ता महत्व
भारत में गिग और प्लेटफॉर्म अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार कर रही है। मई 2026 तक लगभग एक करोड़ श्रमिक इस क्षेत्र से जुड़े हुए थे। सरकारी अनुमानों के अनुसार दशक के अंत तक यह संख्या बढ़कर लगभग 2.5 करोड़ तक पहुंच सकती है। डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग और तकनीकी विकास के कारण यह क्षेत्र रोजगार सृजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनता जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ई-श्रम पोर्टल भारत के असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस है।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 संसद द्वारा पारित चार श्रम संहिताओं में से एक है।
- आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध है।
- गिग और प्लेटफॉर्म कार्य मुख्य रूप से ऐप आधारित और डिजिटल सेवा मंचों से जुड़े होते हैं।
गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार भारत के श्रम बाजार में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है। इससे लाखों श्रमिकों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा मिलेगी तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था में कार्यरत लोगों के लिए अधिक स्थिर और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।