हीटवेव और बिजली गिरना अब आपदा राहत ढांचे का हिस्सा

हीटवेव और बिजली गिरना अब आपदा राहत ढांचे का हिस्सा

देश में भीषण गर्मी और आकाशीय बिजली से होने वाले नुकसान को अब आपदा राहत व्यवस्था में औपचारिक मान्यता मिल गई है। 4 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के परिचालन दिशानिर्देशों में हीटवेव और बिजली गिरने की घटनाओं को अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल कर लिया गया है। यह कदम 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद उठाया गया है, जो 2026-31 की पुरस्कार अवधि से जुड़ा है।

राहत और सहायता के लिए नई व्यवस्था

राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष यानी SDRF राज्यों के पास उपलब्ध वह प्राथमिक कोष है, जिससे अधिसूचित आपदाओं की स्थिति में तुरंत राहत दी जाती है। जब किसी आपदा में SDRF से अधिक सहायता की जरूरत होती है, तब राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष यानी NDRF से अतिरिक्त मदद दी जाती है। दोनों कोष केंद्र सरकार के आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों के तहत संचालित होते हैं। अब हीटवेव और बिजली गिरने को इस ढांचे में शामिल किए जाने से प्रभावित क्षेत्रों में राहत, सहायता और कुछ हद तक न्यूनीकरण उपायों के लिए इन कोषों का उपयोग संभव होगा। यह बदलाव खास तौर पर उन राज्यों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां गर्मी की लहरें और आकाशीय बिजली बार-बार जान-माल का नुकसान करती हैं।

16वें वित्त आयोग की सिफारिश और बढ़ता जोखिम

16वें वित्त आयोग ने 17 नवंबर 2025 को अपनी रिपोर्ट में इन दोनों खतरों को शामिल करने की सिफारिश की थी। आयोग ने बढ़ती आवृत्ति, तीव्रता और मृत्यु दर का हवाला दिया था। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन से मौसम के पैटर्न में आ रहे बदलावों को भी एक अहम कारण माना गया। भारत में गर्मी की लहरें अब केवल मौसमी असुविधा नहीं रहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन की गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। इसी तरह बिजली गिरने की घटनाएं ग्रामीण और खुले क्षेत्रों में अचानक बड़ी संख्या में जानें ले सकती हैं। ऐसे में इन्हें औपचारिक आपदा सूची में रखना प्रशासनिक तैयारी और वित्तीय सहायता, दोनों के लिहाज से अहम है।

स्वास्थ्य तंत्र और आपदा तैयारी पर असर

1 मार्च से 26 जुलाई 2026 के बीच देश में 4,853 हीटस्ट्रोक मामले और 20 पुष्ट मौतें दर्ज की गईं। इसी अवधि में महाराष्ट्र में 11 पुष्ट हीटस्ट्रोक मौतें और तेलंगाना में 915 हीटस्ट्रोक मामले सामने आए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि गर्मी से जुड़ी बीमारियों के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत हीट-हेल्थ हस्तक्षेप लागू कर रहा है। यह राष्ट्रीय तापजनित बीमारियों से निपटने की कार्ययोजना के अनुरूप है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने हीटवेव प्रबंधन और हीट एक्शन प्लान तैयार करने के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी किए हैं। गर्मी प्रभावित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इन्हीं के आधार पर तैयारी, समन्वय और प्रतिक्रिया की व्यवस्था बनाते हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • SDRF राज्य सरकारों का प्राथमिक आपदा राहत कोष है, जबकि NDRF केंद्र का अतिरिक्त सहायता कोष है।
  • 16वें वित्त आयोग की पुरस्कार अवधि 2026-31 है।
  • आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 भारत में आपदा प्रबंधन का कानूनी आधार प्रदान करता है।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी और समन्वय के लिए शीर्ष निकाय है।

हीटवेव और बिजली गिरने को अधिसूचित आपदाओं में शामिल करना बदलते मौसम के दौर में भारत की आपदा नीति को अधिक व्यावहारिक और समयानुकूल बनाता है। इससे राहत तंत्र, स्वास्थ्य व्यवस्था और राज्य स्तर की तैयारी को एक स्पष्ट वित्तीय और प्रशासनिक आधार मिलेगा।

Originally written on August 5, 2026 and last modified on August 5, 2026.

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