हिमाचल प्रदेश में बनेगा भारत का पहला उच्च ऊंचाई चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र
भारत में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले के केलांग में देश का पहला समर्पित उच्च ऊंचाई चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र स्थापित करने जा रही है। यह केंद्र वर्तमान आईसीएमआर फील्ड स्टेशन को उन्नत कर एक बहुविषयक अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करेगा। इसका उद्देश्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, रोगों की रोकथाम और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं पर गहन शोध को बढ़ावा देना है।
केलांग में क्यों स्थापित किया जा रहा है यह केंद्र?
केलांग हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले का मुख्यालय है और पश्चिमी हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है। यह इलाका वर्ष के कई महीनों तक भारी बर्फबारी के कारण देश के अन्य हिस्सों से लगभग कट जाता है। ऐसी भौगोलिक परिस्थितियां इसे उच्च ऊंचाई से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के अध्ययन के लिए आदर्श स्थान बनाती हैं। यह नया केंद्र भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अंतर्गत कार्य करेगा, जो भारत में जैव-चिकित्सा अनुसंधान की सर्वोच्च संस्था है। यह संस्थान अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य क्षमता निर्माण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
किन क्षेत्रों में होगा अनुसंधान?
इस केंद्र में उच्च ऊंचाई पर मानव शरीर में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों, अनुकूलन (एक्लाइमेटाइजेशन), पर्वतीय चिकित्सा, जलवायु-संवेदनशील रोगों, संक्रामक एवं गैर-संचारी रोगों, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, व्यावसायिक स्वास्थ्य तथा आपदा चिकित्सा पर विस्तृत शोध किया जाएगा। उच्च ऊंचाई चिकित्सा मुख्य रूप से कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड और कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों का मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है। यह अनुसंधान पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों, सैनिकों और पर्यटकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में सहायक होगा।
आधुनिक तकनीक और संस्थागत सहयोग
यह अनुसंधान केंद्र डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म, टेलीमेडिसिन, दवाओं एवं जांच सामग्री की ड्रोन आधारित आपूर्ति तथा वास्तविक समय रोग निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करेगा। इन तकनीकों से दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी, जहां सड़क संपर्क और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं लंबे समय तक सीमित रहती हैं। इस परियोजना में भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), हिमाचल प्रदेश सरकार तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों का सहयोग रहेगा। इससे नागरिक स्वास्थ्य अनुसंधान, रक्षा चिकित्सा, पर्वतीय लॉजिस्टिक्स और फील्ड आधारित वैज्ञानिक अध्ययन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। केलांग की सीमावर्ती भौगोलिक स्थिति और यहां की जनजातीय आबादी इस केंद्र को दीर्घकालिक स्वास्थ्य अनुसंधान, आपदा प्रबंधन तथा शीत क्षेत्र चिकित्सा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की स्थापना वर्ष 1911 में इंडियन रिसर्च फंड एसोसिएशन के रूप में हुई थी और 1949 में इसका नाम बदलकर आईसीएमआर रखा गया।
- सामान्यतः 2,500 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों को उच्च ऊंचाई क्षेत्र माना जाता है।
- एक्यूट माउंटेन सिकनेस (एएमएस), हाई-एल्टीट्यूड पल्मोनरी एडेमा (एचएपीई) और हाई-एल्टीट्यूड सेरेब्रल एडेमा (एचएसीई) उच्च ऊंचाई से जुड़ी प्रमुख चिकित्सीय स्थितियां हैं।
- लाहौल-स्पीति हिमाचल प्रदेश के सबसे कम जनसंख्या घनत्व वाले जिलों में से एक है और सर्दियों में लंबे समय तक भौगोलिक रूप से अलग-थलग रहता है।
उच्च ऊंचाई चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र की स्थापना भारत में पर्वतीय स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देगी। यह केंद्र न केवल दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य सुधार में योगदान देगा, बल्कि सीमावर्ती और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में चिकित्सा सेवाओं, आपदा प्रबंधन तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को भी नई मजबूती प्रदान करेगा।