सेबी ने म्यूनिसिपल बॉन्ड नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने 13 मई 2026 को म्यूनिसिपल डेब्ट सिक्योरिटीज नियमों में संशोधन के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया। यह प्रस्ताव नगर निकायों द्वारा पूंजी बाजार से धन जुटाने की प्रक्रिया को अधिक लचीला और व्यापक बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। इसमें मौजूदा ऋण के पुनर्वित्त, खुलासा मानकों, स्पेशल पर्पज व्हीकल के माध्यम से पूल्ड फाइनेंसिंग और निजी प्लेसमेंट वाले म्यूनिसिपल बॉन्ड की फेस वैल्यू में बदलाव जैसे प्रावधान शामिल हैं।
म्यूनिसिपल डेब्ट सिक्योरिटीज क्या हैं
म्यूनिसिपल डेब्ट सिक्योरिटीज यानी म्यूनिसिपल बॉन्ड ऐसे ऋण साधन हैं जिन्हें शहरी स्थानीय निकाय पूंजी बाजार से धन जुटाने के लिए जारी करते हैं। भारत में नगर निगम, नगरपालिकाएं और अधिसूचित क्षेत्र समितियां स्थानीय स्वशासन के संवैधानिक ढांचे के अंतर्गत कार्य करती हैं। इन बॉन्डों के माध्यम से शहरी बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति, सड़क, स्वच्छता और सार्वजनिक सेवाओं के लिए वित्त जुटाया जाता है।
प्रस्तावित प्रमुख बदलाव
सेबी के प्रस्ताव के अनुसार अब नगर निकाय मौजूदा ऋण के पुनर्वित्त के लिए भी बॉन्ड जारी कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें ऋणदाताओं, पुनर्भुगतान अनुसूची, ब्याज लागत और पुराने ऋण पुनर्गठन की जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। कार्यशील पूंजी संबंधी आवश्यकताओं के लिए जुटाई गई राशि पर 25 प्रतिशत की सीमा तय करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
पूल्ड फाइनेंसिंग और एसपीवी व्यवस्था
नए प्रस्ताव में कई शहरी स्थानीय निकायों को स्पेशल पर्पज व्हीकल यानी एसपीवी के माध्यम से संयुक्त रूप से धन जुटाने की अनुमति देने की बात कही गई है। इसके अंतर्गत एस्क्रो व्यवस्था और क्रेडिट एन्हांसमेंट जैसे प्रावधान शामिल होंगे। इससे छोटे नगर निकायों को भी पूंजी बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी
सेबी ने निजी प्लेसमेंट वाले म्यूनिसिपल बॉन्ड की फेस वैल्यू को घटाकर 10,000 रुपये या 1 लाख रुपये करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है। इसके अलावा पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक मानकों यानी ईएसजी आधारित म्यूनिसिपल बॉन्ड के लिए भी प्रावधान जोड़े गए हैं।
भारत में म्यूनिसिपल बॉन्ड बाजार
31 मार्च 2026 तक भारत में 22 नगर निगमों ने 31 निर्गमों के माध्यम से लगभग 4,540 करोड़ रुपये जुटाए हैं। सेबी ने इस परामर्श पत्र पर 3 जून 2026 तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सेबी के म्यूनिसिपल डेब्ट सिक्योरिटीज नियम पहली बार वर्ष 2015 में अधिसूचित किए गए थे।
- म्यूनिसिपल बॉन्ड शहरी निकायों द्वारा बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं के लिए जारी किए जाने वाले ऋण साधन हैं।
- स्पेशल पर्पज व्हीकल परियोजना कार्यान्वयन और पूल्ड फाइनेंसिंग के लिए बनाई गई अलग कानूनी इकाई होती है।
- ESG का अर्थ Environment, Social and Governance है।
सेबी का यह प्रस्ताव भारत में नगर निकायों की वित्तीय क्षमता बढ़ाने और शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पूंजी बाजार में नगर निकायों की भागीदारी और निवेशकों की रुचि दोनों बढ़ सकती हैं।