सीएसआईआर-एनएएल के स्वदेशी माइक्रो गैस टर्बाइन इंजन से रक्षा तकनीक को बढ़त

सीएसआईआर-एनएएल के स्वदेशी माइक्रो गैस टर्बाइन इंजन से रक्षा तकनीक को बढ़त

सीएसआईआर-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (CSIR-NAL) ने 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय में तीन स्वदेशी माइक्रो और छोटे गैस टर्बाइन इंजन पेश किए। NJ-05, NJ-50 और NJ-100 नाम वाले इन इंजनों की थ्रस्ट क्षमता क्रमशः 5 किलोग्राम, 50 किलोग्राम और 100 किलोग्राम है। यह विकास भारत की रक्षा और एयरोस्पेस प्रणालियों के लिए हल्के, तेज और कॉम्पैक्ट प्रोपल्शन समाधानों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

क्या हैं माइक्रो और छोटे गैस टर्बाइन इंजन

गैस टर्बाइन इंजन आंतरिक दहन इंजन होते हैं, जिनमें हवा को संपीड़ित किया जाता है, ईंधन मिलाया जाता है और फिर गर्म गैसों को टर्बाइन से गुजारकर थ्रस्ट या शाफ्ट पावर पैदा की जाती है। माइक्रो और छोटे गैस टर्बाइन इंजन खास तौर पर उन प्लेटफॉर्म के लिए उपयोगी होते हैं, जहां कम वजन, उच्च घूर्णन गति और सीमित आकार में अधिक शक्ति की जरूरत होती है।

इनका उपयोग आम तौर पर मानव रहित प्रणालियों, टारगेट ड्रोन, क्रूज़-प्रकार की प्रणालियों और अन्य हल्के एयरोस्पेस अनुप्रयोगों में किया जाता है। इसी कारण रक्षा क्षेत्र में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

रक्षा उपयोग के लिहाज से क्यों अहम हैं ये इंजन

नए इंजन विशेष रूप से सामरिक मानव रहित हवाई वाहनों, ड्रोन इंटरसेप्टर और कॉम्पैक्ट मिसाइल प्रणालियों के लिए तैयार किए गए हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म में इंजन का आकार छोटा होना, वजन कम होना और उच्च प्रदर्शन देना बेहद जरूरी होता है।

इस तरह की तकनीक से भारत को विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम विकसित होने से रक्षा उत्पादन में स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स की भूमिका भी बढ़ती है।

विकास प्रक्रिया और संस्थागत भूमिका

कार्यक्रम में चीफ गेस्ट के रूप में एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, मौजूद रहे। सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक डॉ. अभय ए. पशिलकर ने प्रयोगशाला को एक बहु-स्तरीय इंटीग्रेटर बताया और भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप्स तथा उद्योग जगत से निर्माण सहयोग की अपील की।

सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने इन उप-प्रणालियों के विकास को आत्मनिर्भर भारत के ढांचे से जोड़ा। NJ-100 का विकास पहले के स्केल्ड-डाउन NJ-5 टेक्नोलॉजी डेमॉन्स्ट्रेटर के उड़ान परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर किया गया है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • CSIR-NAL, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की एक घटक प्रयोगशाला है।
  • गैस टर्बाइन इंजन ब्रेटन चक्र पर काम करते हैं, जिसका उपयोग जेट प्रणोदन और बिजली उत्पादन में होता है।
  • कॉम्पैक्ट टर्बाइन इंजन डिजाइन में हाई-RPM टर्बोमशीनरी एक प्रमुख इंजीनियरिंग क्षेत्र है।
  • छोटे टर्बाइन इंजनों में दक्ष थ्रस्ट के लिए उच्च-ताप दहन प्रणालियां आवश्यक होती हैं।

NJ-05 से NJ-100 तक फैला यह इंजन परिवार स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता के विस्तार का संकेत देता है। रक्षा तकनीक में यह प्रगति भारत के लिए कॉम्पैक्ट और उच्च-प्रदर्शन प्रोपल्शन सिस्टम के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोलती है।

Originally written on August 25, 2026 and last modified on August 25, 2026.

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