समुद्र मंथन योजना से अपतटीय तेल-गैस खोज को नई गति

समुद्र मंथन योजना से अपतटीय तेल-गैस खोज को नई गति

केंद्र सरकार ने भारत में अपतटीय तेल और गैस खोज को मजबूत करने के लिए ‘समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना’ को मंजूरी दी है। 31 जुलाई 2026 को स्वीकृत यह योजना पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसके लिए वित्त वर्ष 2030-31 तक ₹84,084 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य देश के तलछटी बेसिनों में हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज बढ़ाना और ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में घरेलू संसाधन जोड़ना है।

योजना का लक्ष्य और रणनीतिक महत्व

समुद्र मंथन योजना का फोकस भारत के समुद्री क्षेत्रों में खोज कार्यों को आधुनिक तकनीक के साथ विस्तार देना है। इसमें 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समतुल्य से अधिक भंडार वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना विशेष रूप से अपतटीय क्षेत्रों में भूकंपीय सर्वेक्षण, गहरे पानी में ड्रिलिंग, साझा समुद्री अवसंरचना और तेल-गैस से जुड़ी विनिर्माण एवं सेवा इकाइयों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।भारत के लिए यह पहल इसलिए भी अहम है क्योंकि कच्चे तेल के आयात पर देश की निर्भरता 2025-26 में 88.7% तक पहुंच गई है। प्राकृतिक गैस के मामले में भी आयात निर्भरता लगभग 50% है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है।

योजना के प्रमुख घटक

इस योजना को चार बड़े वित्तीय घटकों में बांटा गया है, ताकि खोज से लेकर अवसंरचना तक पूरी श्रृंखला को समर्थन मिल सके।

  • आधुनिक अपतटीय भूकंपीय डेटा संग्रहण और प्रसंस्करण के लिए ₹28,534 करोड़।
  • 60 गहरे समुद्री अन्वेषण कुओं की ड्रिलिंग के लिए ₹43,200 करोड़।
  • साझा अपतटीय अवसंरचना हब के लिए ₹10,000 करोड़।
  • तेल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों के लिए ₹2,000 करोड़।

भूकंपीय डेटा समुद्र तल और समुद्री उपसतह से प्राप्त भू-भौतिकीय जानकारी होती है, जिससे हाइड्रोकार्बन की संभावनाओं का आकलन किया जाता है। वहीं, गहरे पानी के अन्वेषण कुएं उच्च जल-गहराई वाले क्षेत्रों में विशेष रिग्स की मदद से खोदे जाते हैं।

‘समुद्र मंथन’ नाम और पृष्ठभूमि

इस योजना का नाम भारतीय सांस्कृतिक संदर्भ से लिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 में लाल किले से स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान आधुनिक ‘समुद्र मंथन’ की बात कही थी। उसी विचार को आगे बढ़ाते हुए इस योजना का नाम रखा गया है। यह नाम ऊर्जा संसाधनों की खोज को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसमें तकनीक, निवेश और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा तीनों का मेल है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल भारत सरकार का सर्वोच्च कार्यकारी निर्णय लेने वाला निकाय है।
  • केंद्रीय क्षेत्र योजना पूरी तरह केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित होती है।
  • MMToE का अर्थ है Million Metric Tons of Oil Equivalent, यानी तेल समतुल्य मिलियन मीट्रिक टन।
  • अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र में मुख्य रूप से तेल और प्राकृतिक गैस की खोज तथा उत्पादन शामिल होता है।

समुद्र मंथन योजना से भारत की अपतटीय खोज क्षमताओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यदि यह योजना तय लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ती है, तो देश की ऊर्जा सुरक्षा, घरेलू उत्पादन और समुद्री अवसंरचना तीनों पर इसका व्यापक असर दिख सकता है।

Originally written on August 1, 2026 and last modified on August 1, 2026.

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