सतकोसिया टाइगर रिजर्व में फिर शुरू होगी बाघ पुनर्स्थापना परियोजना

सतकोसिया टाइगर रिजर्व में फिर शुरू होगी बाघ पुनर्स्थापना परियोजना

भारत में बाघ संरक्षण को नई गति देते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने 30 जून 2026 को ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना परियोजना दोबारा शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। वर्ष 2026 के आकलन के समय इस टाइगर रिजर्व में एक भी बाघ मौजूद नहीं था। इससे पहले वर्ष 2018 में शुरू किया गया बाघ पुनर्स्थापना प्रयास असफल रहा था, जिसके बाद परियोजना को रोक दिया गया था। अब आवश्यक सुधारों और सुरक्षा उपायों के साथ इसे पुनः शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

सतकोसिया टाइगर रिजर्व की विशेषताएं

सतकोसिया टाइगर रिजर्व ओडिशा में स्थित है और इसका कुल क्षेत्रफल 1,136 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 523 वर्ग किलोमीटर का कोर क्षेत्र शामिल है, जबकि शेष भाग बफर क्षेत्र के रूप में संरक्षित है। घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और ऐतिहासिक रूप से बाघों की उपस्थिति के कारण इस क्षेत्र को बाघ पुनर्वास के लिए उपयुक्त माना गया है। कोर और बफर क्षेत्र की व्यवस्था भारत के अधिकांश टाइगर रिजर्व की प्रमुख विशेषता है।

बाघ पुनर्स्थापना परियोजना क्या है?

बाघ पुनर्स्थापना एक वन्यजीव प्रबंधन प्रक्रिया है, जिसके तहत उन संरक्षित क्षेत्रों में बाघों को स्थानांतरित किया जाता है जहां उनकी संख्या अत्यधिक कम हो गई हो या वे पूरी तरह समाप्त हो चुके हों। भारत में ऐसी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार प्रजातियां, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और मानव-वन्यजीव संघर्ष की प्रभावी निगरानी अनिवार्य मानी जाती है। इन सभी मानकों का मूल्यांकन करने के बाद ही किसी परियोजना को स्वीकृति दी जाती है।

एनटीसीए की समीक्षा और प्रमुख शर्तें

सतकोसिया परियोजना की व्यवहार्यता का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने मई 2024 में पांच सदस्यीय केंद्रीय समिति का गठन किया था। यह समीक्षा ओडिशा सरकार द्वारा वर्ष 2023-24 में भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर की गई। समिति की सिफारिशों का पालन करने के बाद ही परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली। प्रमुख शर्तों में स्वैच्छिक ग्राम पुनर्वास, शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाना, मानव हस्तक्षेप से मुक्त क्षेत्र विकसित करना, वन कर्मचारियों का क्षमता निर्माण तथा रिजर्व के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना शामिल है।

2018 का असफल प्रयास और उससे मिले सबक

वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश से एक नर और एक मादा बाघ को सतकोसिया टाइगर रिजर्व में लाया गया था। हालांकि, नर बाघ की मृत्यु शिकारी द्वारा लगाए गए फंदे में फंसने से हो गई, जबकि मादा बाघ ‘सुंदरी’ मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के कारण वापस भेज दी गई। इस परियोजना की विफलता के पीछे कम शिकार घनत्व, असुरक्षित आवास, कमजोर सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय समुदायों का सीमित सहयोग प्रमुख कारण माने गए। नए चरण में इन सभी कमियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) भारत में बाघ संरक्षण की वैधानिक संस्था है, जो वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत कार्य करती है।
  • सतकोसिया टाइगर रिजर्व ओडिशा में स्थित है और इसमें कोर तथा बफर दोनों क्षेत्र शामिल हैं।
  • भारत में बाघ पुनर्स्थापना परियोजनाओं से पहले शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ाना एक महत्वपूर्ण शर्त होती है।
  • टाइगर रिजर्व में ‘इनवायलेट स्पेस’ ऐसे क्षेत्र होते हैं जहां मानव हस्तक्षेप और स्थायी बस्तियां न्यूनतम या प्रतिबंधित रहती हैं।

सतकोसिया टाइगर रिजर्व में बाघ पुनर्स्थापना परियोजना की दोबारा शुरुआत भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण कदम है। यदि सभी निर्धारित शर्तों का प्रभावी ढंग से पालन किया जाता है, तो यह परियोजना न केवल सतकोसिया में बाघों की वापसी सुनिश्चित कर सकती है, बल्कि देश में भविष्य की बाघ पुनर्वास योजनाओं के लिए भी एक सफल मॉडल साबित हो सकती है।

Originally written on July 1, 2026 and last modified on July 1, 2026.

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