श्रीलंका को भारत की दवा सहायता से टीबी नियंत्रण को नई मजबूती
भारत ने श्रीलंका को लगभग तीन टन एंटी-टीबी दवाएं भेजकर उसके तपेदिक नियंत्रण कार्यक्रम को नई सहायता दी है। यह खेप 28 सितंबर 2026 को भारतीय वायुसेना के C-130J विमान से कोलंबो पहुंचाई गई। यह कदम दोनों देशों के बीच सार्वजनिक स्वास्थ्य सहयोग और विकास साझेदारी को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
भारत-श्रीलंका स्वास्थ्य सहयोग की निरंतरता
भारत और श्रीलंका के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग लंबे समय से जारी है। इसमें दवाओं की आपूर्ति, तकनीकी सहायता और विकास अनुदान जैसी व्यवस्थाएं शामिल रही हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी श्रीलंका की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को समर्थन देने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया है।
यह सहायता ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों ने टीबी नियंत्रण को लेकर सहयोग जारी रखने पर चर्चा की थी। यह बैठक 8 सितंबर 2026 को तिमोर-लेस्ते के दिली में WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति के 79वें सत्र के दौरान हुई थी।
टीबी नियंत्रण में दवाओं और निगरानी की भूमिका
तपेदिक या टीबी एक संक्रामक रोग है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक जीवाणु से फैलता है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन मस्तिष्क, गुर्दे और हड्डियों तक भी फैल सकता है। इस बीमारी के उपचार में तय अवधि तक कई एंटी-टीबी दवाओं का संयोजन दिया जाता है।
राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रमों में बीमारी की पहचान, उपचार और उपचार के बाद निगरानी पर विशेष जोर दिया जाता है, ताकि संक्रमण का प्रसार कम किया जा सके। ऐसे में दवाओं की समय पर आपूर्ति किसी भी देश के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने का अहम हिस्सा होती है।
क्षेत्रीय मंचों पर भी दिख रहा है सहयोग
भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग केवल दवा आपूर्ति तक सीमित नहीं है। दोनों देश क्षेत्रीय स्वास्थ्य मंचों पर भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाए रखते हैं। WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति इस दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां सदस्य देश क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों पर साझा रणनीति बनाते हैं।
इसी व्यापक सहयोग का एक उदाहरण श्रीलंका के मन्नार स्थित जिला सामान्य अस्पताल में भी दिखा, जहां 16 सितंबर 2026 को भारत सरकार के अनुदान से नए दो-मंजिला दुर्घटना एवं आपातकालीन इकाई के निर्माण की शुरुआत हुई। यह अनुदान 600 मिलियन श्रीलंकाई रुपये का है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय वायुसेना का C-130J एक सैन्य परिवहन विमान है, जिसका उपयोग एयरलिफ्ट मिशनों में किया जाता है।
- टीबी एक संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है, लेकिन शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकता है।
- WHO की दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय समिति विश्व स्वास्थ्य संगठन के इस क्षेत्र का एक वैधानिक मंच है।
- भारत श्रीलंका के साथ विकास साझेदारी के तहत अनुदान और तकनीकी सहायता दोनों का उपयोग करता है।
इस ताजा सहायता से श्रीलंका के टीबी नियंत्रण प्रयासों को व्यावहारिक समर्थन मिला है और दोनों देशों के स्वास्थ्य सहयोग की निरंतरता भी स्पष्ट हुई है।