त्रिनिदाद और टोबैगो में यूपीआई की एंट्री से डिजिटल भुगतान को नई रफ्तार
त्रिनिदाद और टोबैगो कैरेबियाई क्षेत्र का पहला देश बनने जा रहा है जो भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई को अपनाएगा। यह कदम सिर्फ एक तकनीकी साझेदारी नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है। प्रस्तावित प्लेटफॉर्म यूपीआई मॉडल पर आधारित होगा और इसका विकास भारत की एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड तथा त्रिनिदाद और टोबैगो के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्रालय के बीच तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है।
यूपीआई मॉडल क्यों खास माना जाता है
यूपीआई एक रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जो मोबाइल के जरिए बैंक-से-बैंक तुरंत लेनदेन की सुविधा देती है। इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह अलग-अलग बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के बीच इंटरऑपरेबल भुगतान संभव बनाती है। भारत में यह व्यवस्था खुदरा डिजिटल भुगतान का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुकी है।
यह प्रणाली व्यक्ति से व्यक्ति, व्यक्ति से व्यापारी और सरकार से व्यक्ति तक भुगतान को सपोर्ट करती है। इसी वजह से इसे केवल एक ऐप या भुगतान माध्यम नहीं, बल्कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
समझौते से लेकर लागू करने की दिशा तक
इस प्लेटफॉर्म के विकास के लिए समझौता 10 सितंबर 2024 को हुआ था और 26 सितंबर 2024 को औपचारिक आदान-प्रदान समारोह भी आयोजित किया गया। इसके बाद त्रिनिदाद और टोबैगो के केंद्रीय बैंक के गवर्नर डॉ. एल्विन हिलायर ने अक्टूबर 2024 में बताया कि 2025 में पायलट कार्यक्रम शुरू किया जाएगा और वर्ष के अंत तक पूर्ण कार्यान्वयन की उम्मीद है।
त्रिनिदाद और टोबैगो की उच्चायुक्त ने 29 सितंबर 2026 को कहा कि इस परियोजना पर सक्रिय रूप से काम आगे बढ़ रहा है। इससे साफ है कि यह पहल चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है और अभी इसका फोकस तकनीकी तैयारी तथा क्रियान्वयन ढांचे पर है।
भारत-त्रिनिदाद सहयोग और रणनीतिक महत्व
यूपीआई पहल भारत और त्रिनिदाद और टोबैगो के व्यापक सहयोग का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो यात्रा के दौरान छह समझौता ज्ञापनों और समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए थे। इस साझेदारी में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि प्लेटफॉर्म का पूर्ण स्वामित्व और नियंत्रण त्रिनिदाद और टोबैगो सरकार के पास रहेगा, जबकि भारत तकनीकी सहायता और कौशल हस्तांतरण देगा।
यह मॉडल उन देशों के लिए खास महत्व रखता है जो नकदी पर निर्भरता घटाना, लेनदेन लागत कम करना और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाना चाहते हैं। कैरेबियाई क्षेत्र में यूपीआई का प्रवेश भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को भी मजबूत करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- त्रिनिदाद और टोबैगो कैरेबियाई क्षेत्र का पहला देश होगा जो यूपीआई अपनाएगा।
- एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड, यूपीआई के अंतरराष्ट्रीय विस्तार से जुड़ी इकाई है।
- यूपीआई व्यक्ति-से-व्यक्ति, व्यक्ति-से-व्यापारी और सरकार-से-व्यक्ति भुगतान को सपोर्ट करता है।
- त्रिनिदाद और टोबैगो के केंद्रीय बैंक ने पायलट चरण को 2025 से जोड़कर देखा है।
यह पहल दिखाती है कि भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली अब घरेलू दायरे से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी जगह बना रही है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य देशों के लिए भी एक संदर्भ बन सकता है।