भारत-यूएई निवेश साझेदारी को नई रफ्तार
मुंबई में 28 सितंबर 2026 को भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल ऑन इन्वेस्टमेंट्स की 14वीं बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी के प्रबंध निदेशक शेख हमद बिन जायद अल नाहयान ने की।
निवेश और व्यापार बढ़ाने पर फोकस
यह संयुक्त कार्यबल 2013 में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बनाया गया था। इसका एक अहम उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने के लिए मंच उपलब्ध कराना भी है। हालिया बैठक में द्विपक्षीय व्यापार को 2032 तक 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हुई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत-यूएई द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। वहीं 2025 में गैर-तेल व्यापार 76.2 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह संकेत देता है कि ऊर्जा क्षेत्र से आगे बढ़कर दोनों देशों का आर्थिक रिश्ता अब विविध क्षेत्रों में फैल रहा है।
बड़े निवेश प्रस्तावों पर चर्चा
बैठक में गुजरात के फूड पार्क प्रोजेक्ट और ओडिशा में एकीकृत एल्युमिनियम कॉम्प्लेक्स के लिए 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर के संयुक्त निवेश प्रस्ताव पर विचार किया गया। इसके अलावा यूएई ने निकट भविष्य में भारत में 25 अरब अमेरिकी डॉलर अतिरिक्त निवेश की मंशा जताई है। दीर्घकालिक लक्ष्य कुल निवेश को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का है।
गुजरात के धोलेरा में प्रस्तावित विमानन और लॉजिस्टिक्स हब के अवसरों पर भी चर्चा हुई। यह दिखाता है कि भारत-यूएई सहयोग अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक ढांचे, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तक फैल रहा है।
डिजिटल भुगतान और रणनीतिक सहयोग
बैठक में स्थानीय मुद्रा में निपटान, भुगतान और मैसेजिंग प्रणालियों के एकीकरण तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं पर भी बात हुई। भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई को यूएई के इंस्टेंट पेमेंट प्लेटफॉर्म से जोड़ने की संभावना पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसके साथ ही नागरिक उड्डयन, ऊर्जा, आधारभूत ढांचा, प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष, खाद्य सुरक्षा और स्टार्टअप जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। यह भारत-यूएई संबंधों को एक व्यापक आर्थिक और तकनीकी साझेदारी के रूप में स्थापित करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत-यूएई उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल ऑन इन्वेस्टमेंट्स की स्थापना 2013 में हुई थी।
- ADIA का पूरा नाम अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी है, जिसका मुख्यालय अबू धाबी में है।
- यूपीआई भारत की रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है, जिसका उपयोग त्वरित लेनदेन के लिए होता है।
- केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा, केंद्रीय बैंक द्वारा जारी डिजिटल रूप में संप्रभु मुद्रा होती है।
मुंबई बैठक से यह स्पष्ट हुआ कि भारत और यूएई अब निवेश, डिजिटल भुगतान और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को अगले स्तर पर ले जाने के लिए तैयार हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दोनों देशों की आर्थिक प्राथमिकताओं को नई दिशा दे सकती है।