शॉट पुट खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता बलविंदर सिंह धालीवाल का निधन

शॉट पुट खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता बलविंदर सिंह धालीवाल का निधन

भारतीय एथलेटिक्स के अनुभवी शॉट पुट खिलाड़ी और अर्जुन पुरस्कार विजेता बलविंदर सिंह धालीवाल का 1 जून 2026 को चंडीगढ़ में 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे भारत के उन प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्होंने एशियाई स्तर पर देश का नाम रोशन किया।

शॉट पुट में शानदार प्रदर्शन

शॉट पुट एथलेटिक्स की फील्ड स्पर्धा है, जिसमें खिलाड़ी कंधे से एक हाथ की मदद से भारी गोलाकार गोला फेंकता है। पुरुष वर्ग में मानक शॉट का वजन 7.26 किलोग्राम होता है। बलविंदर सिंह धालीवाल ने इसी स्पर्धा में लंबे समय तक भारत का प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा बनाए रखा।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां

धालीवाल 1981 से 1992 के बीच शॉट पुट में 10 बार राष्ट्रीय चैंपियन बने। उन्होंने 1982 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता। इसके अलावा 1983 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत, 1985 में स्वर्ण और 1987 में कांस्य पदक हासिल किया। 1986 में नई दिल्ली में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने 18.71 मीटर का एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया।

सम्मान और योगदान

धालीवाल को 1983 में महाराजा रणजीत सिंह पुरस्कार और 1987 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 1988 में उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। खेल जीवन के बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी में एथलेटिक्स कोच के रूप में कार्य किया और चंडीगढ़ एथलेटिक्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष भी रहे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • 1982 एशियाई खेल भारत की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित हुए थे।
  • अर्जुन पुरस्कार भारत के प्रमुख राष्ट्रीय खेल पुरस्कारों में से एक है।
  • एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन एशियाई एथलेटिक्स संघ करता है।
  • लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भारत की प्रमुख रिकॉर्ड संदर्भ पुस्तक है।

बलविंदर सिंह धालीवाल का जीवन भारतीय खेल जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। एक खिलाड़ी, रिकॉर्डधारी और कोच के रूप में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को मेहनत, अनुशासन और खेल भावना का संदेश देता रहेगा।

Originally written on June 5, 2026 and last modified on June 5, 2026.

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