जे. पी. दास: ओड़िया साहित्य और प्रशासन जगत की प्रतिष्ठित हस्ती

जे. पी. दास: ओड़िया साहित्य और प्रशासन जगत की प्रतिष्ठित हस्ती

ओड़िया साहित्य के प्रसिद्ध कवि, नाटककार, कला इतिहासकार तथा पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी जे. पी. दास का 3 जून 2026 को भुवनेश्वर स्थित उनके आवास पर 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका पूरा नाम जगन्नाथ प्रसाद दास था। उनका जन्म 26 अप्रैल 1936 को ओडिशा के पुरी जिले में हुआ था। साहित्य, कला और प्रशासन के क्षेत्र में उनके योगदान ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई।

प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका

जे. पी. दास ने वर्ष 1958 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। अपने प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। विशेष रूप से 1965-66 के दौरान कालाहांडी में पड़े भीषण अकाल और सूखे के समय वे जिले के कलेक्टर रहे। उस कठिन दौर में प्रशासनिक नेतृत्व और जनसेवा के लिए उनके कार्यों को सराहा गया। बाद में उन्होंने 1984 में समय से पूर्व सेवानिवृत्ति लेकर साहित्य और बौद्धिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया।

साहित्य और कला जगत में अमिट योगदान

प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहने के साथ-साथ जे. पी. दास ने साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में ‘प्रथमा पुरुष’, ‘अह्निका’ और ‘परिक्रमा’ शामिल हैं। उन्होंने ऐतिहासिक उपन्यास ‘देशा कला पात्र’ की भी रचना की, जिसे ओड़िया साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। उनकी साहित्यिक प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। वर्ष 2006 में उन्हें प्रतिष्ठित सरस्वती सम्मान प्रदान किया गया। हालांकि, उन्होंने 1990 में अपनी चर्चित काव्य कृति ‘अह्निका’ के लिए दिए गए साहित्य अकादमी पुरस्कार को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिससे वे साहित्यिक जगत में चर्चा का विषय बने।

अंतिम इच्छा और श्रद्धांजलि

जे. पी. दास के परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके पार्थिव शरीर को चिकित्सा अनुसंधान के लिए एम्स भुवनेश्वर को दान करने का निर्णय लिया। यह कदम समाज और चिकित्सा शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके निधन पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी सहित अनेक साहित्यकारों, कलाकारों और जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त किया।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की स्थापना वर्ष 1947 में हुई थी और यह भारत सरकार के अधीन कार्य करती है।
  • सरस्वती सम्मान की स्थापना के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा वर्ष 1991 में की गई थी।
  • साहित्य अकादमी पुरस्कार भारत के प्रमुख साहित्यिक सम्मानों में से एक है।
  • एम्स भुवनेश्वर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान है।

जे. पी. दास का जीवन प्रशासनिक दक्षता, साहित्यिक सृजनशीलता और सामाजिक प्रतिबद्धता का अद्भुत उदाहरण था। उनकी रचनाएं और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे तथा ओड़िया साहित्य में उनका योगदान सदैव स्मरण किया जाएगा।

Originally written on June 5, 2026 and last modified on June 5, 2026.

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