शुभदा वरदकर को संगीत नाटक अकादमी सम्मान, ओडिसी को मिली नई पहचान
ओडिसी नृत्य की जानी-मानी साधक शुभदा वरदकर को 2025 का संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 13 अगस्त 2026 को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह सम्मान दिया। पुरस्कार के साथ उन्हें एक लाख रुपये, ताम्रपत्र और अंगवस्त्रम भी प्रदान किया गया।
ओडिसी साधना को मिला राष्ट्रीय सम्मान
शुभदा वरदकर मुंबई की रहने वाली ओडिसी कलाकार हैं और वे पहले अर्थशास्त्र की प्रोफेसर भी रह चुकी हैं। उनका चयन इस बात का संकेत है कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य में केवल मंचीय प्रस्तुति ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साधना, अनुशासन और सांस्कृतिक योगदान को भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाती है।
ओडिसी भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य रूपों में शामिल है। यह नृत्य ओडिशा की मंदिर परंपराओं, भक्ति-आधारित प्रस्तुति और महारी तथा गोटीपुआ परंपराओं से विकसित हुआ है। इसकी पहचान त्रिभंग मुद्रा, लचीले धड़-आंदोलन और मूर्तिकला जैसी हस्त-मुद्राओं से होती है।
संगीत नाटक अकादमी का महत्व
संगीत नाटक अकादमी की स्थापना 1953 में भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी के रूप में की गई थी। यह संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करती है और प्रदर्शन कलाओं में उत्कृष्टता को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार, फैलोशिप और अन्य मान्यताएँ देती है। अकादमी पुरस्कार को प्रदर्शन कलाओं के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में गिना जाता है।
यह सम्मान संगीत, नृत्य, रंगमंच, लोक एवं पारंपरिक कलाओं और कठपुतली कला जैसे क्षेत्रों में दिया जाता है। आमतौर पर ऐसे राष्ट्रीय समारोह नई दिल्ली में आयोजित होते हैं और इनमें देश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारी शामिल होते हैं।
शुभदा वरदकर की यात्रा और प्रेरणा
शुभदा वरदकर का कलात्मक सफर भी प्रेरणादायक है। उन्होंने गुरु केलुचरण महापात्र के एक कार्यशाला में भाग लेने के बाद ओडिसी सीखना शुरू किया। वे कैंसर से उबर चुकी हैं और इसके बावजूद उन्होंने नृत्य-साधना को निरंतर जारी रखा।
उन्होंने मराठी आत्मकथात्मक पुस्तक मयूरपंख और अंग्रेजी पुस्तक The Celestial Plume भी लिखी है। उनके परिवार का स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ाव रहा है; उनके परिजन मनोहर और मणिक वरदकर ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- संगीत नाटक अकादमी की स्थापना 1953 में हुई थी।
- यह भारत की राष्ट्रीय संगीत, नृत्य और नाटक अकादमी है।
- ओडिसी भारत के आठ शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक है।
- विज्ञान भवन, नई दिल्ली, राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख आधिकारिक समारोहों का महत्वपूर्ण स्थल है।
शुभदा वरदकर को मिला यह सम्मान भारतीय शास्त्रीय नृत्य की जीवंत परंपरा और उसमें महिलाओं की सशक्त भूमिका को रेखांकित करता है। यह उपलब्धि ओडिसी की समृद्ध विरासत को भी राष्ट्रीय मंच पर और अधिक प्रतिष्ठा देती है।