शिशु आहार दावों पर FSSAI की सख्ती, नेस्ले इंडिया पर तीन मामले

शिशु आहार दावों पर FSSAI की सख्ती, नेस्ले इंडिया पर तीन मामले

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े कथित नियम उल्लंघन के मामले में नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन adjudication मामले शुरू किए हैं। इनमें दो मामले प्रचार दावों से जुड़े हैं, जबकि एक मामला लैब जांच में फॉलो-अप फॉर्मूला के मानक से नीचे पाए जाने पर दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई शिशु आहार के विज्ञापन, लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों पर नियामक निगरानी को फिर से चर्चा में लाती है।

किन दावों पर उठे सवाल

पहला मामला NAN Excella Pro Stage 1 से जुड़ा है, जिसके प्रचार में “5 HMOs” और “Whey Protein” जैसे दावे किए गए थे। दूसरा मामला Lactogen Pro 1 के “easy-to-digest” और whey protein संबंधी दावे से जुड़ा है। FSSAI ने इन उत्पादों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध उनके प्रचार सामग्री की जांच की और कंपनी से स्पष्टीकरण भी मांगा।

शिशु पोषण उत्पादों में किसी भी दावे को केवल आकर्षक मार्केटिंग के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि उसे तय मानकों और लेबलिंग नियमों के आधार पर परखा जाता है। यदि कोई दावा भ्रामक माना जाता है या निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होता, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।

शिशु आहार पर भारत में क्या नियम लागू हैं

भारत में शिशु आहार और उससे जुड़े उत्पादों का नियमन Food Safety and Standards Act, 2006 तथा Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के तहत होता है। इसके अलावा Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods (Regulation of Production, Supply and Distribution) Act, 1992 शिशु दूध विकल्पों और संबंधित उत्पादों के विज्ञापन व प्रचार पर कड़े प्रतिबंध लगाता है।

इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु पोषण उत्पादों के बारे में उपभोक्ताओं को सही, स्पष्ट और वैज्ञानिक रूप से उचित जानकारी मिले। Regulation 4(2) विशेष रूप से ऐसे दावों और लेबलिंग को नियंत्रित करता है, जो उपभोक्ता को भ्रमित कर सकते हैं।

लैब जांच में क्या मिला

तीसरा मामला नेस्ले इंडिया के एक फॉलो-अप फॉर्मूला सैंपल से जुड़ा है, जिसे बायोटिन की मात्रा के लिहाज से मानक से नीचे पाया गया। बाद में रेफरल लैबोरेटरी ने भी इस निष्कर्ष की पुष्टि की। खाद्य सुरक्षा व्यवस्था में प्रयोगशाला परीक्षण एक अनिवार्य और कानूनी प्रक्रिया है, जिसके आधार पर उत्पाद की गुणवत्ता और मानकों का आकलन किया जाता है।

FSSAI के पास खाद्य सुरक्षा, लेबलिंग और मानक उल्लंघनों पर adjudication proceedings शुरू करने का अधिकार है। ऐसे मामलों में जुर्माना या अन्य नियामक कार्रवाई संभव होती है, इसलिए यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे शिशु आहार बाजार के लिए अनुपालन का संकेत भी देता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • FSSAI, Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत भारत का वैधानिक खाद्य नियामक है।
  • Infant Milk Substitutes, Feeding Bottles and Infant Foods Act, 1992 शिशु दूध विकल्पों के प्रचार पर प्रतिबंध लगाता है।
  • HMO का पूरा नाम human milk oligosaccharides है, जो शिशु पोषण फॉर्मूलेशन में उपयोग होते हैं।
  • Biotin एक जल में घुलनशील B-विटामिन है, जिसे vitamin B7 भी कहा जाता है।

यह मामला दिखाता है कि शिशु पोषण जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विज्ञापन, लेबलिंग और गुणवत्ता मानकों पर नियामक संस्थाएं अब और अधिक सख्ती से नजर रख रही हैं।

Originally written on September 18, 2026 and last modified on September 18, 2026.

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