वैश्विक लैंगिक समानता सूचकांक में भारत की स्थिति जस की तस
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स 2026 रिपोर्ट में भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर रहा। पिछले संस्करण की तरह इस बार भी देश की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ, हालांकि समग्र लैंगिक समानता स्कोर में मामूली सुधार दर्ज किया गया।
ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स क्या मापता है
यह सूचकांक हर साल जारी किया जाता है और देशों में पुरुषों व महिलाओं के बीच अंतर को चार प्रमुख आयामों पर परखता है। इनमें आर्थिक भागीदारी और अवसर, शैक्षिक उपलब्धि, स्वास्थ्य और जीवन-स्तर, तथा राजनीतिक सशक्तीकरण शामिल हैं। इसी आधार पर यह तय किया जाता है कि किसी देश ने लैंगिक समानता की दिशा में कितनी प्रगति की है।
भारत के प्रदर्शन की तस्वीर
2026 में भारत का समग्र जेंडर पैरिटी स्कोर 64.5% रहा, जो वैश्विक औसत 69.2% से कम है। इसका अर्थ है कि दुनिया भर में औसतन 69.2% लैंगिक अंतर कम हो चुका है, जबकि भारत इस औसत से पीछे है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा, जहां पैरिटी स्कोर 96.6% दर्ज किया गया।
राजनीतिक सशक्तीकरण के मामले में भारत की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही और यह देश का सबसे ऊंचा उप-सूचकांक रहा। इस श्रेणी में भारत का लैंगिक समानता स्तर 24.5% रहा तथा वैश्विक रैंक 67वीं रही। दूसरी ओर, आर्थिक भागीदारी और अवसर भारत की सबसे कमजोर कड़ी बनी रही, जहां पैरिटी 41.2% दर्ज की गई।
वैश्विक परिदृश्य और भारत के लिए संकेत
रिपोर्ट के अनुसार, आइसलैंड ने लगातार 17वें वर्ष पहला स्थान हासिल किया और उसने 93% लैंगिक अंतर कम कर लिया। वैश्विक स्तर पर मौजूदा गति बनी रही तो पूर्ण लैंगिक समानता हासिल करने में लगभग 120 वर्ष लग सकते हैं। यह आंकड़ा बताता है कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत के सामने भी रोजगार, नेतृत्व और निर्णय-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा जारी किया जाता है।
- 2026 संस्करण में कुल 145 देशों का आकलन किया गया।
- भारत का 2026 में स्थान 131वां रहा और यह 2025 जैसा ही रहा।
- आइसलैंड ने 17वीं बार लगातार इस सूचकांक में पहला स्थान प्राप्त किया।
यह रिपोर्ट भारत के लिए खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षा में मजबूत स्थिति के बावजूद रोजगार और राजनीतिक भागीदारी में मौजूद अंतर को सामने लाती है।