ट्राई ने स्पैम कॉल्स पर कसा शिकंजा, एआई से होगी पहचान

ट्राई ने स्पैम कॉल्स पर कसा शिकंजा, एआई से होगी पहचान

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने अनचाही व्यावसायिक कॉल्स और संदेशों पर नियंत्रण के लिए अपना ढांचा और सख्त कर दिया है। 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में किए गए संशोधनों के तहत अब संदिग्ध स्पैम की पहचान में एआई-आधारित प्रणाली, उपभोक्ता शिकायत की नई प्रक्रिया और टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं के लिए अतिरिक्त अनुपालन जिम्मेदारियां शामिल की गई हैं।

अब स्पैम पहचान में एआई की भूमिका बढ़ी

ट्राई के नए प्रावधानों के अनुसार, टेलीकॉम ऑपरेटरों को ऐसे नंबरों की पहचान करनी होगी जिनसे स्पैम भेजे जाने की संभावना अधिक है। इसके बाद यह जानकारी अन्य ऑपरेटरों के साथ साझा की जाएगी, ताकि एक ही स्रोत से आने वाली संदिग्ध गतिविधि पर समन्वित कार्रवाई हो सके।

पहले की तुलना में यह व्यवस्था अधिक सक्रिय है, क्योंकि इसमें केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय डेटा-आधारित पहचान पर जोर दिया गया है। 2026-27 की पहली तिमाही में एआई-आधारित प्रणालियों ने लगभग 721.79 अरब इनकमिंग कॉल्स में से 22.99 अरब कॉल्स को संदिग्ध स्पैम के रूप में चिह्नित किया था।

एक ही स्रोत से बार-बार उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई

संशोधित नियमों में यह भी तय किया गया है कि यदि किसी प्रेषक से जुड़े पांच या उससे अधिक नंबर 10 दिनों के भीतर फ्लैग किए जाते हैं, तो चरणबद्ध कार्रवाई की जा सकती है। इसमें केवाईसी की दोबारा जांच, भौतिक सत्यापन, आउटगोइंग सेवाओं पर रोक और बार-बार उल्लंघन की स्थिति में कनेक्शन विच्छेदन तक की कार्रवाई शामिल है।

ट्राई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टेलीकॉम नेटवर्क का दुरुपयोग करने वाले संस्थानों पर केवल चेतावनी नहीं, बल्कि वास्तविक अनुपालन दबाव बने। इससे फर्जी प्रमोशनल कॉल्स, ऑटोमेटेड कॉलिंग सिस्टम और अनधिकृत टेलीमार्केटिंग पर असर पड़ने की उम्मीद है।

ए2पी कॉल्स और उपभोक्ता शिकायत का नया ढांचा

ट्राई ने Application-to-Person यानी A2P कॉल्स की परिभाषा भी स्पष्ट की है। ये वे कॉल्स हैं जो किसी व्यक्ति द्वारा सीधे डायल करने के बजाय एप्लिकेशन, सॉफ्टवेयर सिस्टम या ऑटोमेटेड प्लेटफॉर्म से शुरू की जाती हैं। रोबोकॉल, प्री-रिकॉर्डेड वॉइस कॉल और कृत्रिम आवाज वाली कॉल्स इसी श्रेणी में आती हैं।

ऐसी सेवाओं का उपयोग करने वाले संस्थानों को अपने टेलीकॉम सेवा प्रदाता के सामने पहले से यह घोषित करना होगा कि वे ऑटोमेटेड सिस्टम और किन नंबरों का उपयोग कर रहे हैं। यदि यह घोषणा नहीं की गई, तो ऐसी कॉल्स को अनचाही व्यावसायिक संचार यानी UCC माना जाएगा।

इन A2P कॉल्स पर अधिकतम 5 पैसे प्रति मिनट का टर्मिनेशन चार्ज लागू होगा। हालांकि, नियामित व्यावसायिक कॉल्स के लिए तय नंबरिंग सीरीज और प्राधिकृत कॉल्स को इससे छूट दी गई है। साथ ही, कॉल-मैनेजमेंट ऐप्स को अब वैध व्यावसायिक कॉल सीरीज को बिना वजह ब्लॉक नहीं करना होगा, ताकि सही कॉल्स भी बाधित न हों।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ट्राई की स्थापना टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट, 1997 के तहत की गई थी।
  • ट्राई टेलीकॉम क्षेत्र में टैरिफ, इंटरकनेक्शन, सेवा गुणवत्ता और व्यावसायिक संचार से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है।
  • रोबोकॉल वे स्वचालित कॉल्स होती हैं जो प्री-रिकॉर्डेड या सिंथेटिक वॉइस सिस्टम से की जाती हैं।
  • TRAI DND ऐप का उपयोग उपभोक्ता अनचाही व्यावसायिक कॉल्स और संदेशों की शिकायत दर्ज करने के लिए करते हैं।

ट्राई के ये बदलाव उपभोक्ता सुरक्षा और टेलीकॉम अनुशासन, दोनों को मजबूत करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। इससे स्पैम कॉल्स पर नियंत्रण, वैध व्यावसायिक संचार की पहचान और शिकायत निवारण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और प्रभावी होने की उम्मीद है।

Originally written on September 18, 2026 and last modified on September 18, 2026.

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