शर्मिला ढंकर की स्वर्णिम थ्रो से भारत ने तोड़ा 20 साल का सूखा

शर्मिला ढंकर की स्वर्णिम थ्रो से भारत ने तोड़ा 20 साल का सूखा

ग्लासगो में 27 जुलाई 2026 को हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की शर्मिला ढंकर ने महिलाओं की F57 शॉट पुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश को बड़ी उपलब्धि दिलाई। उन्होंने 9.81 मीटर का सीजन-बेस्ट थ्रो किया और इसी के साथ भारत का पैराअथलेटिक्स में कॉमनवेल्थ गेम्स पदक का 20 साल लंबा इंतजार खत्म हो गया। भारत को इस श्रेणी में पिछला पदक 2006 में मिला था।

शर्मिला की जीत क्यों खास है

यह उपलब्धि सिर्फ एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय पैरास्पोर्ट्स के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली सफलता भी है। F57 वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ी निचले अंगों की अक्षमता, अंग-विच्छेदन या मांसपेशियों की कम शक्ति जैसी स्थितियों के साथ मैदान में उतरते हैं। इस वर्ग की शॉट पुट स्पर्धा में खिलाड़ी बैठकर थ्रो करते हैं, इसलिए तकनीक, संतुलन और ताकत का संयोजन निर्णायक होता है। शर्मिला का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्होंने दबाव वाले मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो निकाला और भारत को शीर्ष स्थान दिलाया।

भारत के लिए डबल पोडियम और बढ़ी उम्मीदें

इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने भी कांस्य पदक जीता। पहले नाइजीरिया की यूकारिया इयियाज़ी को पदक मिला था, लेकिन आधिकारिक समीक्षा के बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया, जिसके बाद शिल्पा को पदक मिला। इस तरह यह कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का पैराअथलेटिक्स में पहला डबल पोडियम फिनिश बना। एक ही इवेंट में स्वर्ण और कांस्य, दोनों पदक मिलना भारतीय दल के लिए गहराई और प्रतिस्पर्धी क्षमता का संकेत है। यह बताता है कि भारत अब केवल एक-दो नामों पर निर्भर नहीं है, बल्कि कई एथलीट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक की दौड़ में शामिल हो रहे हैं।

भारत की पदक तालिका और दिन की उपलब्धियां

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पांचवें दिन भारत ने पैराअथलेटिक्स, वेटलिफ्टिंग और एथलेटिक्स में कुल छह पदक जीते। 28 जुलाई 2026 तक भारत की कुल पदक संख्या 10 हो गई थी, जिसमें दो स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य शामिल थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने 28 जुलाई 2026 को शर्मिला ढंकर को बधाई दी। यह आधिकारिक सराहना इस बात को रेखांकित करती है कि पैरास्पोर्ट्स की उपलब्धियों को अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उतनी ही गंभीरता से देखा जा रहा है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कॉमनवेल्थ गेम्स राष्ट्रमंडल देशों के खिलाड़ियों का बहु-खेल आयोजन है।
  • पैराअथलेटिक्स में शारीरिक अक्षमता वाले खिलाड़ियों के लिए ट्रैक और फील्ड स्पर्धाएं शामिल होती हैं।
  • F57 वर्ग का उपयोग शॉट पुट, डिस्कस थ्रो और जैवलिन थ्रो जैसी फील्ड स्पर्धाओं में किया जाता है।
  • ग्लासगो ने 2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स सहित कई बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की है।

शर्मिला ढंकर की यह जीत भारतीय पैराअथलेटिक्स के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे न केवल पदक तालिका मजबूत हुई, बल्कि आने वाले आयोजनों के लिए भी भारत की प्रतिस्पर्धी स्थिति और अधिक सशक्त दिखी।

Originally written on July 28, 2026 and last modified on July 28, 2026.

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