वैश्विक जबरन विस्थापन में एक दशक बाद पहली गिरावट
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में वैश्विक जबरन विस्थापन के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है। यह पिछले एक दशक में पहली बार है जब दुनिया भर में जबरन विस्थापित लोगों की संख्या में गिरावट देखने को मिली। वर्ष 2025 के अंत तक लगभग 117.8 मिलियन लोग जबरन विस्थापन की स्थिति में थे, जबकि वर्ष 2024 के अंत में यह संख्या 123.2 मिलियन थी। हालांकि यह कमी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, फिर भी वैश्विक स्तर पर विस्थापन का आंकड़ा इतिहास के सबसे ऊंचे स्तरों में बना हुआ है।
जबरन विस्थापन और शरणार्थियों की स्थिति
जबरन विस्थापन में वे सभी लोग शामिल होते हैं जिन्हें युद्ध, हिंसा, उत्पीड़न, मानवाधिकार उल्लंघन या अन्य संकटों के कारण अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसमें शरणार्थी, शरण मांगने वाले व्यक्ति, आंतरिक रूप से विस्थापित लोग तथा अन्य प्रभावित समुदाय शामिल होते हैं। यूएनएचसीआर के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक वैश्विक शरणार्थी आबादी 41.6 मिलियन रही। वहीं 68.6 मिलियन लोग अपने ही देशों की सीमाओं के भीतर आंतरिक रूप से विस्थापित बने रहे। यह दर्शाता है कि कई देशों में संघर्ष और अस्थिरता अभी भी बड़े पैमाने पर लोगों को प्रभावित कर रही है।
घर वापसी में उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ष 2025 के दौरान लगभग 14.7 मिलियन विस्थापित लोग अपने घरों या मूल क्षेत्रों में लौटे। इनमें 4.4 मिलियन शरणार्थी और 10.3 मिलियन आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति शामिल थे। अफगानिस्तान, सूडान और सीरिया में सबसे अधिक वापसी दर्ज की गई। शरणार्थियों की वापसी का यह आंकड़ा पिछले 60 वर्षों में दूसरा सबसे बड़ा स्तर माना गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कई लोग असुरक्षित परिस्थितियों में लौटे, जहां बुनियादी सेवाओं, रोजगार और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। इसलिए केवल वापसी के आंकड़ों को स्थायी समाधान के रूप में नहीं देखा जा सकता।
आंतरिक विस्थापन की चुनौती बरकरार
वैश्विक स्तर पर जबरन विस्थापन में कमी आने के बावजूद आंतरिक विस्थापन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वर्ष 2025 में कम से कम 32.3 मिलियन नए आंतरिक विस्थापन दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक प्रभावित देशों में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य शामिल रहे। ईरान में लगभग 10 मिलियन और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में 9.7 मिलियन नए आंतरिक विस्थापन दर्ज किए गए। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं, संघर्षों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण लोगों का अपने ही देशों के भीतर विस्थापन लगातार जारी है।
पुनर्वास कार्यक्रमों में गिरावट
शरणार्थियों के पुनर्वास और प्रायोजन कार्यक्रमों के तहत दूसरे देशों में पहुंचने वालों की संख्या में उल्लेखनीय कमी देखी गई। वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 81,800 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में 188,800 लोगों को पुनर्वास या प्रायोजन योजनाओं के तहत सहायता मिली थी। यह कमी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पुनर्वास अवसरों में आई चुनौतियों को दर्शाती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- यूएनएचसीआर (संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त) शरणार्थियों और राज्यविहीन व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए कार्य करने वाली संयुक्त राष्ट्र एजेंसी है।
- शरणार्थी वह व्यक्ति होता है जो उत्पीड़न, संघर्ष या हिंसा के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर दूसरे देश में शरण लेता है।
- आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्ति (आईडीपी) अपने देश की सीमाओं के भीतर ही विस्थापित रहता है।
- 1951 का शरणार्थी सम्मेलन (रिफ्यूजी कन्वेंशन) शरणार्थियों की सुरक्षा से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कानूनी दस्तावेज माना जाता है।
वैश्विक जबरन विस्थापन में दर्ज की गई यह गिरावट एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन दुनिया भर में करोड़ों लोग अभी भी संघर्ष, हिंसा और असुरक्षा के कारण अपने घरों से दूर रहने को मजबूर हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह आवश्यक है कि वह शरणार्थियों और विस्थापित लोगों की सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने के लिए अपने प्रयासों को और मजबूत करे।