फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए भारत ने UNRWA को 2.5 मिलियन डॉलर की सहायता दी
भारत ने 11 जून 2026 को फिलिस्तीनी शरणार्थियों की सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) को 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान देने की घोषणा की। यह राशि भारत की वार्षिक 5 मिलियन डॉलर सहायता का पहला हिस्सा है। इस वित्तीय सहयोग का उद्देश्य फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत और सामाजिक सेवाएं उपलब्ध कराने वाले कार्यक्रमों को समर्थन देना है। भारत लंबे समय से फिलिस्तीन के मानवीय और विकासात्मक सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
UNRWA क्या है और इसकी भूमिका
संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी फॉर फिलिस्तीन रिफ्यूजीज़ इन द नियर ईस्ट (UNRWA) की स्थापना वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीनी शरणार्थियों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह एजेंसी जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में रहने वाले लाखों फिलिस्तीनी शरणार्थियों को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, राहत सहायता और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम प्रदान करती है। क्षेत्र में जारी संघर्ष और मानवीय संकट के कारण UNRWA की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
फिलिस्तीन के लिए भारत की मानवीय सहायता
भारत का यह नवीनतम योगदान UNRWA के मुख्य कार्यक्रमों और सेवाओं के संचालन में सहायता करेगा। इससे पहले भारत ने 2024-25 के लिए अपनी 5 मिलियन डॉलर की वार्षिक सहायता दो समान किश्तों में प्रदान की थी। पहली किश्त 18 जुलाई 2024 को और दूसरी किश्त 18 नवंबर 2024 को जारी की गई थी। अक्टूबर 2023 से नवंबर 2024 के बीच भारत ने फिलिस्तीन को चार चरणों में लगभग 135 मीट्रिक टन मानवीय सहायता भेजी। इस सहायता में खाद्य सामग्री, राहत सामग्री तथा चिकित्सा आपूर्ति शामिल थीं। भारत ने आवश्यकता के अनुसार UNRWA को दवाइयों की आपूर्ति करने की भी प्रतिबद्धता जताई है।
चिकित्सा सहायता और राहत सामग्री
भारत द्वारा भेजी गई मानवीय सहायता में लगभग 81.5 मीट्रिक टन दवाइयां और चिकित्सा सामग्री शामिल थीं। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को देखते हुए यह सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। भारत का मानना है कि मानवीय सहायता संकटग्रस्त लोगों तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचनी चाहिए। इसी नीति के तहत भारत लगातार फिलिस्तीनी नागरिकों और शरणार्थियों की सहायता करता रहा है।
भारत का कूटनीतिक रुख
भारत कई दशकों से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद के समाधान के लिए दो-राष्ट्र समाधान (टू-स्टेट सॉल्यूशन) का समर्थन करता आया है। इस नीति के तहत भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करता है, जो इजरायल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रह सके। 11 जून 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने भी इस पारंपरिक नीति को दोहराया। भारत का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता केवल संवाद और कूटनीतिक समाधान के माध्यम से ही संभव है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- UNRWA की स्थापना वर्ष 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी।
- यह एजेंसी जॉर्डन, लेबनान, सीरिया, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी शरणार्थियों को सेवाएं प्रदान करती है।
- भारत ने 2023-24 तक UNRWA के मुख्य कार्यक्रमों और सेवाओं के लिए कुल 35 मिलियन डॉलर का योगदान दिया था।
- भारत अक्टूबर 2023 से नवंबर 2024 के बीच फिलिस्तीन को लगभग 135 मीट्रिक टन मानवीय सहायता भेज चुका है।
भारत का यह नया योगदान फिलिस्तीनी शरणार्थियों के प्रति उसकी मानवीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है। आर्थिक सहायता, चिकित्सा सामग्री और राहत प्रयासों के माध्यम से भारत न केवल मानवीय सहयोग को मजबूत कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता भी प्रदर्शित कर रहा है।